सोनोग्राफी जांच पर सवाल सेंटरों की भरमार
Bhaskar News Wednesday, November 04, 2009 08:31 [IST]  

भीलवाड़ा. जिले में संचालित 35 सोनोग्राफी सेंटर्स में 23 सेंटर्स का संचालन अनुभव आधारित सोनोलॉजिस्ट्स द्वारा किया जा रहा है। इन 23 में से अधिकांश के पास मान्यता प्राप्त संस्थान का अनुभव नहीं है। सोनोलॉजिस्ट्स के प्रमाणीकरण पर फिलहाल राज्य के चिकित्सा महकमे में खासी बहस छिड़ी हुई है।



बीते दिनों राज्य सलाहकार समिति की बैठक में सदस्यों ने ऐसे व्यक्तियों के सेंटर्स का पंजीकरण नहीं करने को कहा कि जिन्होंने व्यक्तिगत आधार पर प्रमाणपत्र हासिल किया है। सलाहकार समिति के सदस्यों की सिफारिशांे का मान लिया जाता है कि जिले में संचालित अधिकांश सेंटर्स पंजीकरण रद्द हो सकता है।



दरअसल, कन्या भ्रूण हत्या पर चकित्सा विभाग व स्वंयसेवी संस्थान की जागरुकता के बाद सोनोग्राफी सेंटर्स की विश्वसनीयता व संचालन की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत सोनोलॉजिस्ट को इंडियन मेडिकल कौसिंल अधिनियम 1956 के तहत मान्य योग्यताओं में से एक रखता हो।



सोनोग्राफी करने वाला अल्ट्रा सोनोग्राफी, इमेजिंग टेक्नीक्स या रेडियोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट होना चाहिए। इस अधिनियम की अनुसूची में उन विश्वविद्यालयों को संस्थानों की सूची भी दी गई है, जो डिग्रियां देने के लिए मान्यता प्राप्त है। इस एक्ट के तहत अन्य कोई व्यक्ति या गैर मान्यता प्राप्त संस्थान सोनोलॉजिस्ट का प्रमाणपत्र नहीं दे सकता है।



अभी क्या हो रहा है



वर्तमान में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत सेंटर्स का पंजीकरण करवाकर काम करने वाले किसी भी निजी संस्थान से सोनोलॉजिस्ट्स का प्रमाणपत्र हासिल कर रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि छह माह की ट्रेनिंग लेकर और कम से कम 100 सोनोग्राफी करवाकर यह डिप्लोमा हासिल किया जा सकता है। दरअसल, यह प्रावधान पूर्व में सरकार ने किए थे। पीसीपीएनडीटी एक्ट और सरकार द्वारा तय किए गए नियम ही चिकित्सा विभाग की मुश्किल बढ़ा रहे हैं।



चिकित्सा विभाग की मंशा



चिकित्सा विभाग को अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सोनोलॉलिस्ट्स का प्रमाणीकरण किसके द्वारा किया जाए। विभाग के उच्चाधिकारी के अनुसार विभाग ने प्रमाणीकरण का यह मामला केंद्र सरकार को भेज रखा है।



अनुभव आधारित सोनोलॉजिस्ट्स को सरकार ने स्वीकृति दे रखी है। एक्ट की जो बात बताई गई है उसको गहना से देखना पड़ेगा। नयों का रजिस्ट्रेशन अभी नहीं किया गया है। पुरानों को किस आधार पर पंजीकृत किया गया, इसका पता लगाया जाएगा। - आरसी सामरिया, सीएमएचओ



सरकार ने इसका प्रावधान कर रखा है। योग्यताधारी नहीं मिलने पर सरकार ने ट्रेनिंग का नियम बनाया था। पीसीएनडीटी एक्ट में रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर को स्वीकृति दे रखी है, इसके अंतर्गत सभी डॉक्टर्स आते हैं। सरकार प्रमाणीकरण के संबंध में स्पष्ट गाइडलाइन जारी करें। - सुभाष टेलर, सचिव, अल्ट्रासाउंड सोसायाटी



क्यों पड़ी आवश्यकता



पिछले कुछ सालों में सोनोग्राफी सेंटर्स की संख्या में एकदम से बढ़ोतरी हुई है। इनकी संख्या में बढ़ोतरी के साथ ही लिंगानुपात भी गिरावट में भी गिरावट दर्ज की गई। कन्या भ्रूण हत्या का एक कारण भी सोनोग्राफी सेंटर्स की बढ़ती संख्या को माना गया है।

  Bookmark and Share
 


अपने विचार यहां लिखें:
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: