कौशल प्रशिक्षण की आड़ में करोड़ों कमाने की तैयारी
भास्कर न्यूज Wednesday, November 04, 2009 08:30 [IST]  

अलवर. अक्षत कौशल विकास प्रशिक्षण की आड़ में दो संस्थाओं ने करोड़ों रुपए कमाने की तैयारी कर ली है। योजना के तहत बेरोजगारों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण का दावा करते हुए प्रति युवा 23 सौ रुपए से लेकर 25 हजार रुपए तक कमाने का प्रबंध राजस्थान नॉलेज कॉपरेरेशन लि. (आरकेसीएल) और राजस्थान मिशन ऑफ लाइवलीहुड (आरएमओएल) नाम की संस्थाओं ने किया है। इसमें राज्य सरकार प्रति बेरोजगार अधिकतम 96 सौ रुपए का भुगतान प्रशिक्षण दिलवाने वाली संस्था को करेगी।



खास बात यह है कि स्नातक उत्तीर्ण बेरोजगारों को जो बेसिक कंप्यूटर कोर्स करवाया जाता है, ठीक उसी तरह का प्रशिक्षण ये शिक्षित बेरोजगार युवा स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही कर चुके हैं। वर्तमान में प्रदेश में न्यूनतम स्नातक शिक्षित युवाओं की संख्या लाखों में है। ऐसे में इन संस्थाओं को इस योजना में प्रशिक्षण से होने वाली कमाई का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।



प्रति आवेदक से हजारों की कमाई : आरकेसीएल व आरएमओएल ने प्रदेश भर में कंप्यूटर शिक्षा से संबंधित एक सूची राज्य सरकार को दी है। इसमें अलवर जिले में आरकेसीएल के 60 और आरएमओएल के आठ केंद्र हैं। इन संस्थाओं में संचालित कंप्यूटर शिक्षा एवं अन्य कोर्स करवाए जाएंगे। अक्टूबर से प्रभावी हुई इस नई योजना में बेरोजगार स्नातक युवा रोजगार कार्यालय में अक्षत विकास प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए आवेदन करेंगे।



इस पर सामान्य श्रेणी पुरुष बेरोजगारों को दो वर्ष के लिए प्रतिवर्ष 48 सौ, महिलाओं को छह हजार रुपए, निशक्तजनों के लिए 72 सौ रुपए के वाउचर जारी किए जाएंगे। यह वाउचर आवेदन आरकेसीएल या आरएमओएल के केंद्र पर जमा करवाएगा। राज्य सरकार उक्त वाउचर के अनुसार आरसीएल या आरएमओएल को भुगतान कर देगी। संस्थाओं के कोर्स सामन्य दरों से महंगे होने के कारण भी प्रशिक्षणार्थियों को नुकसान उठाना पड़ेगा।



विभिन्न पाठ्यक्रमों का निर्धारण इस प्रकार किया गया है कि प्रशिक्षण का वार्षिक शुल्क 12 से 15 हजार आता है। ऐसे में आवेदक को प्रति वर्ष अंतर राशि का भुगतान करना होगा। इतना ही नहीं दो साल के बाद जारी रहने वाले प्रशिक्षण का शेष तमाम शुल्क आवेदक को अपनी जेब से देना होता है।



बेरोजगार युवाओं का कहना है कि यह योजना महज दो संस्थाओं की कमाई का जरिया बन गई है। बेरोजगार युवकों का यह भी कहना है कि इन संस्थाओं में करवाए जा रहे कोर्स अन्य शिक्षा केंद्रों की अपेक्षा 25 से 30 प्रतिशत महंगे हैं।



नहीं जॉब की गारंटी



आरसीएल और आरएमओएल से जुड़े पदाधिकारी व एक्जीक्यूटिव दावा करते हैं कि इस तरह के प्रशिक्षण रोजगार दिलवाने में सहायक साबित होंगे। रोजगार मिलेगा इस बात की वे कोई गारंटी नहीं देते। आरकेसीएल के नरेश कुमार ने माना कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद रोजगार मिल जाएगा यह जरूरी नहीं है।



बेसिक कंप्यूटर शिक्षा में क्या



प्रशिक्षण के पाठ्यक्रमों पर नजर डालें तो 23 सौ रुपए वाले बेसिक प्रशिक्षण में कंप्यूटर का व्यवहारिक ज्ञान, विंडोज विस्टा, वर्ड प्रोसेसिंग, स्प्रैड शीट, डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम और इंटरनेट की प्रायोगिक जानकारी। सूचना प्रोद्यौगिकी, दैनिक जीवन में कंप्यूटर का उपयोग व इसकी कार्यप्रणाली, कंप्यूटर से संबंधित सामान्य उपकरणों का उपयोग, इंटरनेट व ब्लॉग की जानकारी, ई-मेल, नेट सर्फिग, कंप्यूटर से नेट चेटिंग व फैक्स आदि का ज्ञान।

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