Wednesday, November 04, 2009 08:35 [IST]  

danik bhaskarमोबाइल से चैकिंग सिस्टम का कबाड़ा

भास्कर न्यूज

अलवर. रोडवेज के उड़नदस्ते और परिचालकों के बीच मोबाइल ने विचित्र स्थिति पैदा कर दी है। फ्लाइंग दस्ते की जरा सी हलचल होते ही संबंधित रूट पर चलने वाले सभी परिचालकों को इसकी खबर हो जाती है। मार्ग पर बिना टिकट सवारियों को ले जाने की तमाम शिकायतों के बावजूद अधिकतर परिचालक उड़नदस्ते की पकड़ में नहीं आते और सीधा नुकसान निगम को उठाना पड़ रहा है।



इसमें परिचालकों का मददगार बना है मोबाइल। स्थानीय और सेंटर फ्लाइंग के रूट पर निकलने के बाद जैसे ही किसी बस का अचानक निरीक्षण किया जाता है, इसके थोड़ी देर बाद ही चैक हुई बस का परिचालक अपने दूसरे साथियों को मोबाइल से सूचना पहुंचा देता है। नतीजतन उड़नदस्ते को अक्सर बैरंग लौटना पड़ता है।



इशारों से देते हैं खतरे के संकेत



फोन के अलावा परिचालक एक-दूसरे को बस की हैड लाइट और हाथ के इशारों से भी सचेत करते चलते हैं। मार्ग पर उड़नदस्ते की मौजूदगी के लिए परिचालक द्वारा सामने से आ रही बस के चालक-परिचालक को सावधान करने के लिए दो बार लाइट जलाई जाती है।



गलत सूचना पर आर्थिक दंड



यदि कोई परिचालक अपने दूसरे परिचालक साथी को परेशान करने के लिए गलत सूचना देता है या फिर सूचना फेल हो जाती है तो जुर्माना वसूला जाता है। एक परिचालक ने बताया कि यदि किसी परिचालक की महीने में आठ सूचनाएं फेल हो जाती है तो उससे एक हजार रुपए तक का जुर्माना वसूला जाता है।



नहीं मिल रहे अपेक्षित परिणाम



मत्स्य आगार के मुख्य प्रबंधक श्यामबिहारी कटारा तथा अलवर आगार के चीफ मैनेजर आर.के. अग्रवाल के अनुसार मोबाइल ने चैकिंग सिस्टम का कबाड़ा कर दिया है। चीफ मैनेजर अग्रवाल के अनुसार उनके डिपो के तहत करीब 185 परिचालक कार्यरत हैं तथा सभी के पास मोबाइल होने के कारण उड़नदस्ते की टीम को अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते हैं।



सिर्फ एक बस की होती है सरप्राइज चैकिंग



मत्स्य आगार के यातायात प्रबंधक सुनील भगवती के अनुसार रूट पर मुश्किल से एक ही बस की चैकिंग हो पाती है। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों उड़नदस्ते की टीम ने हरिद्वार जाने वाली बस का चिकानी स्टैंड पर निरीक्षण किया। बस को चैक करने के बाद रवाना कर दिया गया लेकिन इसकी सूचना थोड़ी ही देर में दिल्ली तक पहुंच गई।



एसटीडी बूथ बने कंट्रोल रूम



परिचालकों की मदद मार्ग में स्थित एसटीडी बूथ और विभिन्न ढाबों पर काम करने वाले कर्मचारी भी करते हैं। इसके लिए इन्हें बाकायदा परिचालकों की तरफ से पैसे भी दिए जाते हैं। यदि मोबाइल रेंज में नहीं है या फिर अन्य तकनीकी परेशानियां हैं तो सूचनाओं का आदान-प्रदान एसटीडी बूथों से होता हैं। परिचालकों के बीच ये बूथ कंट्रोल रूम के नाम से पुकारे जाते हैं।

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विचार:

D P Bhagat

Wednesday, 4th Nov 2009, 10:28
I travel in Rajasthan Roadways so many times. When you travel very short up 15-20 k.m. Conductor refuse to give you ticket. He you say just wait I am giving but not give you.

apne vichaar
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