फर्जी विज्ञापन का जाल लालच में लग रही चपत
प्रवीन कौशिक Wednesday, November 04, 2009 09:07 [IST]  

फरीदाबाद. किसी भी तरह के विज्ञापन को पढ़कर उसके पते की अच्छी तरह से जांच करने के बाद ही कोई सौदा करें। एनसीआर में ऐसे कई गिरोह सक्रिय हैं जो अखबारों में विज्ञापन का सहारा लेकर कुछ ही दिन में कई लोगों को ठग कर रफूचक्कर हो चुके हैं।



कुछ मामलों में पुलिस ने ऐसे गिरोहों का भंडाफोड़ भी किया है, लेकिन इसके बावजूद कई गिरोह शहर में अभी सक्रिय हैं। पिछले दिनों ऐसे ही कुछ मामले सार्वजनिक हुए हैं। फर्जी विज्ञापन के सहारे तरह-तरह के प्रलोभन देकर ठगी करने वाले गिरोह के सक्रिय होने से पुलिस भी परेशान है।



आए दिन ऐसे विज्ञापन आते रहते हैं, जिनमें आसान किस्तों पर लोन, दोस्ती, कंप्यूटर, लैपटॉप आदि सामान भारी छूट पर देने की बात कही गई होती है। अकाउंट में पैसे डलवाने के बाद न कंपनी का पता चलता है और न उससे संपर्क हो पाता है।



विज्ञापन के माध्यम से हुए ठगी के मामले



सितंबर में ही एक समाचार पत्र में युवाओं को कम समय में अधिक पैसा कमाने और महिलाओं से हर तरह की बातें करने का प्रलोभन देकर एक गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया। पुलिस ने इस गिरोह के एक महिला सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर उनसे दस रजिस्टर, दो कंप्यूटर, 14 मोबाइल फोन, अलग-अलग 33 सिमकार्ड, चार नकली पैन कार्ड, एक वोटर आईकार्ड, आरसी, 15 एटीएम, डेबिट, क्रेडिट व वीजा, अलग-अलग बैंकों की 13 पासबुक बरामद कीं।



यह कार्रवाई ज्वाइंट पुलिस कमिoAर एएस चावला के आदेश पर की गई थी। दो माह पहले तिगांव निवासी मदन कौशिक ने भी विज्ञापन पढ़कर एक कंप्यूटर के लिए अप्लाई कर दिया। मदन ने संबंधित कंपनी के पास पांच सौ रुपए जमा करा दिए थे, लेकिन अभी तक उन्हें कंप्यूटर नहीं मिला।



वह जब भी कंपनी के अधिकारियों के पास फोन करते है तो उन्हें टालमटोल जवाब दिया जाता है। अक्टूबर में पुलिस कमिoAर पीके अग्रवाल के समक्ष डबुआ कालोनी निवासी धर्मसिंह ने शिकायत में बताया उसने एक समाचार पत्र में विज्ञापन पढ़ा।



इसमें बताया गया कि खाली पड़ी जमीन में एक मोबाइल कंपनी के टॉवर लगवाने पर पांच लाख रुपए एडवांस, 20 हजार रुपए किराया प्रति माह मिलता है। विज्ञापन पढ़कर उसने कंपनी के एक अकाउंट में 6200 रुपए सिक्योरिटी के तौर पर जमा करा दिए, लेकिन इसके बाद उसे पता लगा कि उसके साथ ठगी कर ली गई है। पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया था।



25 सितंबर को सेक्टर नौ निवासी सुनीता वशिष्ठ ने बताया उनके फोन पर फोक्स नाम के व्यक्ति का एसएमएस आया। इसमें विदेशी कार कंपनी के वार्षिक समारोह में उसका सात लाख पौंड का इनाम निकलना बताया गया।



इसके बाद उसने कंपनी अधिकारियों के कहने पर 3 लाख 67 हजार रुपए बताए गए अकाउंट में जमा करा दिए, लेकिन बाद में पता लगा कि उसके साथ ठगी हुई है। सितंबर में तिगांव निवासी भगतसिंह अधाना नामक युवक ने भी एक समाचार पत्र में आसान किस्तों पर शिक्षण लोन दिलाने का विज्ञापन पढ़ा।



इसमें दो से लेकर 15 लाख रुपए तक का लोन दिलाने की बात कही गई थी। भगतसिंह ने कंपनी के अकाउंट नंबर में 750 रुपए डलवा दिए, इसके बाद उनसे 35 हजार रुपयों की मांग की गई। लेकिन जब भगतसिंह कंपनी के बताए गए आफिस के पते पर पहुंचा तो वहां ऐसी कोई कंपनी नहीं थी। उसने फोन नंबर पर संपर्क किया तो कोई जवाब नहीं आया।

क्या कहते हैं ज्वाइंट पुलिस कमिoAर



च्वाइंट पुलिस कमिoAर अशविंद्र सिंह चावला से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसे दो गिरोहों का भडांफोड़ हो चुका है। इसके अलावा जनता को ऐसे विज्ञापन पढ़ने के बाद सबसे पहले उस कंपनी के रजिस्टर्ड डीलर या कंपनी से जाकर संपर्क करना चाहिए।



इसके अलावा आफिस के स्थायी पते की भी जांच कर लें। अगर उन्हें पुलिस की जरूरत है तो वे उनसे संपर्क कर सकते हैं। पुलिस ऐसे गिरोहों की गहनता से जांच कर रही है, जो लोगों को चूना लगा रहे हैं।

  Bookmark and Share
 


अपने विचार यहां लिखें:
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: