स्कूल-कालेज राम भरोसे
भास्कर न्यूज Wednesday, November 04, 2009 09:26 [IST]  

रायगढ़. शिक्षाकर्मियों के हड़ताल पर जाने से स्कूलों के बच्चों को अब चिंता सताने लगी है। क्योंकि तीन माह बाद ही इनकी बोर्ड की परीक्षाएं आरंभ हो जाएंगी और पढ़ाई के नाम पर अभी तक कुछ भी नहीं हुआ है।



बच्चों के पालक भी शिक्षाकर्मियों के हड़ताल से परेशान हैं क्योंकि हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूल में पढ़ने वालों को लिए इस अभी भविष्य के बारे में सोचने के बारे का समय है और ऐसे समय में उनका मार्गदर्शन करने वाले शिक्षक अपनी मांगों के लिए हड़ताल पर बैठे और शिक्षक इन बच्चों की फिक्र को छोड़ अपनी मांगों के पूरे होने तक एक योजनाबद्ध तरीके से हड़ताल पर बैठे हुए हैं।



शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में कुल 2200 प्राथमिक, 900 मिडिल व हाई और हायर सेकेन्डरी के स्कूलो को मिलाकर लगभग 3 हजार 500 स्कूल संचालित है। शिक्षाकर्मी संघ के जिलाअध्यक्ष लक्ष्मीकांत पटेल ने बताया कि ट्रायबल विभाग व शिक्षा विभाग के करीब 13500 शिक्षाकर्मी आंदोलन पर है। इन दोनों विभाग में पढ़ाने वाले शिक्षाकर्मियों के के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठने से जिले के 3500 से भी अधिक स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित है।



इनकी हड़ताल से सबसे ज्यादा प्रभावित प्रायमरी स्कूल के बच्चें हैं क्योंकि वर्ग तीन के शिक्षकों से यह पूरी तरह चलता है। बच्चे अब अपनी पढ़ाई के नुकसान होने के बाद सभी से यही पूछ रहे हैं कि इसमें इनका क्या कसूर। हड़ताल का असर यह है कि स्कूलों के पट तो चपरासी खोल दे रहे हैं पर और बच्चे भी आ रहे है पर शिक्षकों स्कूल न आता देख वे भी अपने घरों की ओर लौट जा रहे हैं।



मंगलवार को अपनी एकसूत्रीय मांग विभागीय संवियलन एवं छठवां वेतनमान को लेकर अनिश्चितकालीन धरना व आंदोलन पर बैठे शिक्षाकर्मियों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। शिक्षाकर्मियों ने सरकार की उपेक्षा से बनी अपनी दयनीय स्थिति को दर्शाते हुए प्रतिकात्मक ढंग से फांसी लगाकर विरोध प्रदर्शन किया और यह जताया कि वर्तमान महंगाई के दौर में इतने अल्प वेतन पर कार्य करना, अपने व अपने परिवार का पालन पोषण करना इतना दूभर हो गया है कि शिक्षाकर्मियों को अब फांसी लगाकर अपना जीवन समाप्त कर ले।



शिक्षाकर्मी संध के जिलाध्यक्ष लक्ष्मीकांत पटेल ने बताया कि धरना व प्रदर्शन की चलता ही रहेगा और 4 नवंबर को प्रत्येक विकासखंड में एक जंगी रैली निकाली जाएगी। जिसमें शत-प्रतिशत उपस्थित होकर शिक्षाकर्मी अपनी आवाज बुलंद करेंगे।



न तिमाही और न छ:माही



स्कू ल खुलने के बाद बच्चों की पढ़ाई के स्तर को परखने के लिए तिमाही और छमाही परीक्षाएं होती हैं, इस बार छुट्टियों के कारण अभी तक न तो तिमाही के पर्चे हो पाएं हैं और न ही छमाही के बारे में सोचा जा रहा है। इसके साथ ही मध्याहन भोजन भी काफी दिनों से ठप पड़ा हुआ है। आने वाले समय में बच्चों को एक्सट्रा क्लास के बोझ से गुजरना पड़ सकता है।



एक शिक्षक के भरोसे स्कूल



वर्तमान में बच्चों के को रही शिक्षा के नुकसान के लिए जिला प्रशासन वैकल्पि व्यवस्था की है जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग व आजक विभाग द्वारा संचालित प्रत्येक स्कूल का संचालन हड़ताल समाप्त न होने तक एक-एक रेग्यूलर शिक्षक के भरोसे किया जाएगा। पर ऐसा किसी भी स्थिति में संभव नहीं है कि एक शिक्षक अपने भरोसे पूरे स्कूल की जिम्मेदारी ले सके।

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