नई दिल्ली. अंबानी बंधुओं के बीच गैस विवाद में बुधवार को तब नाटकीय मोड़ आ गया, जब सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस आरवी रवींद्रन ने खुद को इस मामले से हटा लिया। जस्टिस रवींद्रन की बेटी उस लीगल फर्म से जुड़ी हैं, जो मुकेश अंबानी समूह को कानूनी सलाह देती है।
अब केजी बेसिन गैस विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की नई बेंच करेगी। अपने फैसले के बारे में जस्टिस रवींद्रन ने कहा, ‘मंगलवार को जैसे ही मुझे पता चला कि मेरी बेटी मुकेश अंबानी को सलाह देने वाली लीगल फर्म से जुड़ी है, तभी मैंने इस मामले से हटने का फैसला कर लिया।’ जस्टिस रवींद्रन ने बताया कि उनकी बेटी इस साल एक सितंबर से बेंगलुरू स्थित लॉ फर्म एजेडबी के साथ जुड़ी हैं। यही फर्म मुकेश अंबानी समूह को उनकी विभिन्न परियोजनाओं के बारे में कानूनी सलाह देती है।
काश.. कोई पहले ही बता देता
जस्टिस रवींद्रन के इस फैसले के बाद मामले की सुनवाई कर रही बेंच की अगुवाई कर रहे चीफ जस्टिस केजी बालकृष्णन ने गुरुवार को नई बेंच गठित करने का फैसला किया है। जस्टिस रवींद्रन ने कहा, ‘मुझे लगता है कि इस मामले में न सिर्फ इंसाफ होना चाहिए, बल्कि ऐसा होते हुए दिखाई पड़ना भी चाहिए।’ उन्होंने इस बात पर खेद जताया है कि कोर्ट का छह दिन का कीमती समय बेकार हो गया। जस्टिस रवींद्रन के अनुसार, उनकी बेटी के लीगल फर्म से जुड़े होने की बात पहले ही किसी को उनके ध्यान में लानी चाहिए थी। हालांकि, कोर्ट में मौजूद मुकेश अंबानी की रिलायंस इंस्डस्ट्रीज और अनिल अंबानी की रिलायंस नैचुरल रिसोर्सेज लि. के वकीलों, हरीश साल्वे और राम जेठमलानी ने जस्टिस रवींद्रन से मुकदमे में बने रहने का आग्रह किया, लेकिन वे नहीं माने।