लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने फैसला किया है कि आयातित चीनी से लदी मालगाड़ियों से चीनी को उतरने न दिया जाए। सरकार के इस फैसले का किसान मंच ने स्वागत करते हुए कहा-यह कदम सराहनीय है, इसके बाद भी केन्द्र सरकार की आंख न खुले तो अलग बात है। सरकार के इस कदम से किसान आंदोलन को और ताकत मिली है। इस बीच आल इंडिया शुगर मिल एसोसिएशन के यूपी चैप्टर के अध्यक्ष सीबी पटौदिया ने कहा-यह फैसला तो अस्थाई है क्योंकि कानून व्यवस्था का मामला राज्य सरकार से जुड़ा होता है।
गौरतलब है की प्रदेश में गन्ने का समर्थन मूल्य बढाने की मांग कर रहे किसान आयातित चीनी को प्रदेश में कहीं भी उतारे जने का विरोध कर रहे हैं . सरकार ने आज कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर जिलों के अफसरों को निर्देश दिया गया है कि वे आयातित कच्ची चीनी न उतरने दें। सरकार का मानना है की यदि किसान विभिन्न जिलों में आयातित चीनी उतारने का विरोध कर रहे हैं तो प्रशासन इस मामले में क्यों दखल देकर कसानो की नाराजगी झेले ।
एडीजी कानून व्यवस्था एके जैन मुताबिक कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए यह निर्देश दिया गया है कि आयातित कच्ची चीनी को न उतरने दिया जए। गौरतलब है कि भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने पहले शामली में कांडला पोर्ट से मालगाड़ी में आ रही आयातित कच्ची चीनी की बोरियां उतारकर आग लगा दी और बाद में अन्य जिलों के कार्यकर्ताओं को सतर्क कर दिया। जिसके बाद मेरठ , मुरादाबाद, सहारनपुर और सीतापुर आदि जगहों पर भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने आयातित चीनी उतारे जने के खिलाफ
आंदोलन का एलान कर दिया।