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नेशनल डिफेंस कॉलेज था लश्कर के निशाने पर
Agency Wednesday, November 04, 2009 13:37 [IST]  

वॉशिंगटन। अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई द्वारा पिछले महीने गिरफ्तार किए गए डेविड कोलमन हेडली और तहव्वुर हुसैन राणा लश्कर-ए-तोइबा के एक बड़े आतंकी हमले के षड्यंत्र में शामिल थे। इस षड्यंत्र के तहत डेनमार्क के एक अखबार के कार्यालय और दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज पर हमला किया जाना था।



शिकागो की एक अदालत में राणा की जमानत याचिका का विरोध करते हुए अमेरिका के विधि विभाग के एटॉर्नी ने कहा कि रिहा किए जाने पर राणा समाज के लिए खतरनाक हो सकता है और देश छोड़ कर भी भाग सकता है। दोषी पाए जाने पर राणा को अधिकतम 30 साल की सजा हो सकती है।



पाकिस्तान मूल के कनाडाई नागरिक राणा को एफबीआई ने एक आतंकी हमले का षड्यंत्र रचने के आरोप में उसके स्कूल के मित्र हेडली के साथ गिरफ्तार किया था। दोनों पर डेनमार्क और भारत में आतंकी हमले का षड्यंत्र रचने का आरोप है। अमेरिकी नागरिक हेडली की जमानत याचिका पर दिसंबर में सुनवाई होनी है।



एफबीआई ने दोनों के बीच सात सितंबर को हुई बातचीत रिकॉर्ड की है, जिसमें दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज का एक लक्ष्य के रूप में संदर्भ था।



एफबीआई ने अदालत को बताया कि उसी वार्ता में हेडली और राणा ने डेनमार्क और अन्य लक्ष्यों के बारे में भी चर्चा की, जिसमें भारत के नेशनल डिफेंस कॉलेज का भी जिक्र आया। राणा ने इस दौरान अंग्रेजी के शब्द ‘टॉरगेट’ का इस्तेमाल किया।



शिकागो की अदालत के सामने पिछले महीने दाखिल अपने संशोधित आरोपपत्र में एफबीआई ने कहा था कि राणा और हेडली ने सात सितंबर को हुई अपनी बातचीत में षड्यंत्र के तहत कई लक्ष्यों का जिक्र किया था।



एफबीआई ने अपने पिछले हलफनामे में कहा था कि हेडली ने चार निशानों का खास तौर पर जिक्र किया था, जिसमें एक डेनमार्क भी था। उसके बाद उसने कहा कि 'अल्लाह.. काम पूरा करने में मेरी मदद करे।'



एटॉर्नी ने राणा की जमानत याचिका में कहे गए इस वक्तव्य का भी विरोध किया कि वह निर्दोष है और उसे हेडली ने ‘धोखा’ दिया।

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