बंदूक के साये में आदिवासी क्षेत्रों का विकास संभव नहीं : पीएम
Agency Wednesday, November 04, 2009 15:23 [IST]  

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को कहा कि बढ़ती नक्सल समस्या के मद्देनजर आदिवासियों को मुख्यधारा में लाना जरूरी है। बंदूक के साये में आदिवासी इलाकों का विकास नहीं हो सकता।

उन्होंने माना कि आदिवासियों को आधुनिक आर्थिक व्यवस्था में स्थान न दे पाना व्यवस्थागत असफलता रही है और इसके खतरनाक नतीजे सामने आ रहे हैं। उनके और समाज के बीच बढ़ता फासला खतरनाक मोड़ ले चुका है।

संवेदना की कमी

प्रधानमंत्री वन्य अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्रियों के यहां आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के हितों के प्रति संवेदना की कमी रही है। वनों पर उनके परंपरागत अधिकारों को मान्यता देने के बजाय उन पर सैकड़ों मुकदमे दायर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी जिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं, वे बहुत पेचीदा हैं। उन्हें सहानुभूति और पूरी संवेदना से समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को बदलने के लिए पहले उनका दिल जीतना होगा।

किया जाता है परेशान

प्रधानमंत्री ने माना कि हाल के समय में बहुत सारे आदिवासियों को कानून के जरिए परेशान किया जा रहा है। हालांकि, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश सरकारों ने आदिवासियों पर थोपे मामलों को वापस भी लिया है। उन्होंने इस संबंध में एक नई शुरुआत की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बंदूक के साए तले किसी तरह की सतत आर्थिक गतिविधियां संभव नहीं हैं। जरूरी है कि आधुनिक आर्थिक व्यवस्था में आदिवासियों की अनदेखी और उनके शोषण को खत्म किया जाए।

वन अधिकार कानून लागू हों

उन्होंने कहा कि आदिवासी मामलों का मंत्रालय राष्ट्रीय आदिवासी नीति पर सर्व सम्मति कायम करने की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमत्रियों को अच्छी तरह सुनिश्चित करना चाहिए कि वन अधिकार कानून प्रभावी ढंग से लागू हों।

  Bookmark and Share
 


अपने विचार यहां लिखें:
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: