बरसते रहे रस और रंग
Bhaskar network Wednesday, November 04, 2009 17:03 [IST]  

CG रायपुर. छत्तीसगढ़ की संस्कृति और उसके आकर्षण से बंधे लोगों की भीड़ राज्योत्सव मेले में लगातार बढ़ रही है। शिल्पग्राम में मिल रहा लोगों को खरीदारी का मौका। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी मनोरंजन में लगा रहे चार चांद। रोशनी से नहाए साइंस कालेज ग्राउंड पर चल रहे राज्योत्सव मेले में मंगलवार को जरूरत के सामान के साथ कई तरह की जानकारियां लोगों ने लीं। चाहे वह लेटेस्ट फैशन से संबंधित हो,एसेसरीज या फिर होम डेकोरेशन हो। मनोरंजन के लिए भी कई तरह के कार्यक्रम शहर के साथ दूर-दराज के लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।



मेले में छत्तीसगढ़ी संस्कृति को प्रदर्शित करते शिल्प भी लोगों की पसंद बने हुए हैं। ढोकरा शिल्प, बेल मेटल, टेराकोटा, काष्ठ शिल्प, आयरन ट्राइबल आर्ट लोगों को जमकर खरीदारी का मौका दे रहे हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी लोगों के मनोरंजन में चार चांद लगा रहे हैं। कार्यक्रम शुरू होते ही छोटे और मुख्य दोनों मंच के सामने लोगों की भीड़ जुट गई। राज्योत्सव प्रांगण में भी पंथी, लोकमंच, ककसार नृत्य, कमार नृत्य आदि ने भी छत्तीसगढ़ी संस्कृति बिखेरी।



शिल्पग्राम है खास



राज्योत्सव में शिल्पग्राम ने लोगों की बीच अनोखी छाप छोड़ी है। इसका आकर्षण इतना है कि मेले में आने वाले ज्यादातर लोग इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। वहां सागौन के फर्नीचर, मूर्तियां, बेलमेटल की कलाकृतियां, पेपरमेशी के आकर्षक फ्लावर पॉट आदि से सजे स्टॉल इसकी शोभा बढ़ा रहे हैं।



काष्ठ शिल्प और आयरन ट्राइबल आर्ट



शिल्पग्राम के बीच खड़ी मूर्तियां काष्ठ शिल्प के बारे में जानकारी दे रही हैं। खूबसूरत और बेजोड़ दिखने वाली साल की लकड़ी से बनी इन मूर्तियों की कीमत 14 से 75 हजार रुपए है। आयरन ट्राइबल आर्ट से बनी कलाकृतियां भी प्रदेश की संस्कृति को बयान कर रही हैं। आर्टिस्ट श्याम सुंदर विश्वकर्मा ने बताया कि लामन दिया और तोरन की घंटी लोगों को खूब पसंद आ रही है।



Shreya Ghosalश्रेया के गीतों पर झूमे श्रोता



राज्योत्सव की तीसरी शाम भी संगीत प्रेमियों के लिए खास रही। मुख्य मंच पर हुए कार्यक्रम में प्रसिद्ध पाश्र्व गायिका श्रेया घोषाल ने अपने गीतों से सभी को तरोताजा कर दिया। एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुति से उन्होंने राजधानीवासियों को संगीत की गंगा में डुबकियां लगवरई। देवदास से सांवरिया तक में किए गए अपने कमाल को एक बार फिर दोहराते हुए उन्होंने कई बेहतरीन गीत पेश किए। मेरे पिया अब आजा रे.. गीत से शुरुआत करते हुए वादा रहा प्यार में.. जैसे गीत गाकर उन्होंने लोगों का दिल जीत लिया। पाश्र्व गायिका की बेहतरीन प्रस्तुति का साथ देने राजधानीवासियों ने भी कोई कमी नहीं छोड़ी और हर गाने का जोरदार तालियों से स्वागत किया। छत्तीसगढ़ के मदन चौहान और उनकी टीम ने सूफी गायन, भजन और गजल की प्रस्तुति से सबको आनंदविभोर किया।




शादी के लिए अभी तैयार नहीं: श्रेया



पांच साल की उम्र से ही संगीत के सुर साधने वाली बालीवुड की पाश्र्व गायिका श्रेया घोषाल ने मंगलवार को कई मुद्दों पर बेबाक बातचीत की। प्रदेश में दूसरी बार र्आई श्रेया ने इस बार राज्योत्सव में हिस्सा लिया। वर्ष 2009 के राष्ट्रीय अवार्ड सहित अभी तक दर्जनों अवार्ड जीतने वाली पाश्र्व गायिका श्रेया घोषाल का कहना है कि प्रत्येक में अपना एक विशेष हुनर होता है। इसे पहचानना सर्वप्रथम पैरेंट्स का काम है। अपने बच्चों को उसी एंगल से तराशने में कोई भी श्रेया घोषाल बन सकता है। उनका मानना है कि माता-पिता के प्रोफेशन से हटकर भी उनकी संतान दूसरे क्षेत्रों में बहुत अच्छा कर सकती है। भाभा एटमिक सेंटर में इंजीनियर अपने पापा को उन्होंने अपनी गायकी का पूरा श्रेय दिया। श्रेया ने अपने नाम के बारे में बताया कि किसी टीवी सीरियल को देखकर ही उनके पैरेंट्स ने यह नाम रखा है। संजय लीला भंसाली के निर्देशन में फिल्म देवदास से फिल्मी गायन का कॅरियर शुरू करने वाली 25 वर्ष की श्रेया अभी कम से कम पांच-छह साल बाद ही शादी का विचार रखती हैं।



रियलिटी शो तो एक बिजनेस



रियलिटी शो के संबंध में श्रेया ने कहा कि ऐसे शोज तो केवल धन कमाने के प्लेटफार्म बन गए हैं। यहां कोई किशोर कुमार और लता मंगेशकर बनाने की बात नहीं की जाती। सारेगामा से अपने कॅरियर को नई दिशा देने वाली श्रेया कहती हैं, अब पहले वाली बात नहीं है। फिर भी ऐसे ही किसी शो में विनर बनने के बाद लगातार मेहनत से सफलता जरूर मिल सकती है। उन्होंने भिलाई की 12 साल की शैली की प्रतिभा की तारीफ की जिसने छोटे उस्ताद में अच्छा परफार्म किया। श्रेया का मानना है कि गीतों में फूहड़ता या अश्लीलता बढ़ने से लोग उन्हें अब ज्यादा महत्व नहीं दे रहे। सब कुछ सुनने की आदत सी होती जा रही है। फिर यह देश की संस्कृति के विपरीत है।

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