लुधियाना. सिख संगठनों के पंजाब बंद आह्वान का पूरा असर मंगलवार को दिखा। दुकानें बंद रहीं, वहीं सड़कों पर आवाजाही भी रोज के मुकाबले काफी कम रही। हां गुरुपर्व की छुट्टी के बाद लोगों को एक और दिन की छुट्टी मिल गई, जिसे उन्होंने काफी एंज्वाय किया। एक ओर जहां बंद के कारण शहर सुनसान दिखा, वहीं शहर के पार्क और खाने-पीने के स्थलों पर भीड़ दिखी। शहर के प्रमुख पार्क रोज गार्डन में लोग छुट्टी को पिकनिक के तौर पर सेलिब्रेट कर रहे थे। यही नजारा शहर के रखबाग और सराभा नगर स्थित लेयर वेली पार्क का भी था। यहां भी भारी संख्या में लोग अपने परिवार के साथ पिकनिक के मूड में जमा हुए थे। जबकि शहर के प्रमुख बाजारों में युवा क्रिकेट खेलते हुए नजर आए।
इस बारे में जब सिटी रिपोर्टर ने लोगों से बात की, तो सबका यही रिस्पांस रहा कि उन्हें परिवार के साथ एक और दिन एंज्वाय करने को मिल गया, जो खुशी की बात है। सर्विस मैन संजय जैन ने कहा कि उन्हें प्राइवेट सेक्टर में जॉब करने के कारण बहुत कम समय ही परिवार के लिए मिल पाता है। आज छुट्टी होने के कारण वह अपने परिवार संग पार्क में पिकनिक मनाने चले आए। दुकानदार जगजीतपाल सिंह ने बताया कि बंद के कारण आज उन्हें काफी नुकसान तो उठाना पड़ा, लेकिन परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिल गया।
आज का दिन उन्होंने पहले तो पार्क में गुजारा अब शाम को परिवार के साथ घर में मूवी देखकर व अन्य बातें करके व्यतीत करेंगे। सर्विसमैन कल्पेश अग्रवाल ने कहा कि वह आज सुबह अपने आफिस गए, लेकिन बंद के कारण उन्हें वापस घर लौटना पड़ा, हालांकि उनकी पत्नी भी आज ऑफिस नहीं गई और बच्चे भी घर में थे। ऐसे में शापिंग व फिल्म तो नहीं देखी जा सकती थी, लेकिन आउटिंग के लिए पार्क में आकर काफी रिलीफ मिला। उधर, शहर के अधिकतर सीबीएसई स्कूलों में एक दिन पहले ही छुट्टी घोषित कर दी गई थी, जबिक अन्य स्कूलों में सुबह नोटिस बोर्ड पर छुट्टी का ऐलान कर दिया गया। इसका बच्चों ने भी खूब लाभ उठाया और मंगलवार को दिन खेलकूद कर सेलिब्रेट किया। खाली पड़े बाजारों में भी दुकानदारों ने क्रिकेट खेला और बंद को एंज्वाय किया।
बंद ने बच्चें को बिठाया घर पर
बंद के कारण अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने के बजाए घर पर ही बैठाना उचित समझा। लोग अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे। जिसकी वजह से बच्चों को स्कूल नहीं भेजा। अधिकतर निजी स्कूलों ने सुरक्षा कारणों से पहले ही स्कूल बंद करने की घोषणा की थी, लेकिन सरकारी स्कूल खुले रहे। सरकारी स्कूलों में भी छात्र न के बराबर ही हाजिर रहे और अधिकतर क्लास रूम खाली रहे।
सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल गोबिंद नगर की प्रिंसिपल डा. कमलजीत कौर का कहना है कि बंद की वजह से अधिकतर छात्र घर पर ही रहे। उन्होंने बताया कि जो छात्र स्कूल आए भी थे, आधी छुट्टी के दौरान उनके अभिभावक उन्हें लेने आ गए थे। वहीं शहीद ए आजम सुखदेव थापर सरकारी कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल भारत नगर चौक की प्रिंसिपल कमलजीत कौर ने बताया कि सुरक्षा कारणों की वजह से लड़कियों ने छुट्टी कर दी है। उन्होंने बताया कि अभिभावक ऐसे माहौल में लड़कियों को बाहर नहीं भेजते हैं। इस वजह से स्कूल में उपस्थिति ना के बराबर रही।
थोड़ी राहत तो थोड़ी आफत
बंद का असर हर दैनिक काम पर पड़ना लाजमी है। ऐसे में कुछ को तो फुल टाइम छुट्टी मिल गई, लेकिन कुछ का काम प्रभावित हुआ। मंगलवार को वर्किग लेडीज को एक फायदा दिखा। वो यह कि कहीं भी उन्हें ट्रैफिक का सामना ही नहीं करना पड़ा।
पीआर एजेंसी में कार्यरत एलिस ने बताया कि मुझे हर रोज भारत नगर चौक से गिल चौक तक पहुंचने में उसे काफी समय लग जाता है। मंगलवार को भी वह आधे घंटे का मार्जिन लेकर घर से चली, लेकिन पूरा ट्रैफिक साफ। कहीं ब्रेक लगाने की जरूरत ही नहीं। मैं रोजाना की तुलना में आधे समय में ही गिल चौक पहुंच गई। गिल चौक पर भी बस या ऑटो में चढ़ने की रोज दिखने वाली आपाधापी आज गायब थी। अगर रोज ऐसा ट्रैफिक हो जाए तो क्या कहने।
हर चौक पर ट्रैफिक पुलिस कर्मी नजर आ रहा था। वहीं एक्सपोर्ट मैनेजर के रूप में काम करने वाली मिनी अरोड़ा की भी कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया रही। उन्होंने बताया कि मुझे आज ऑफिस पहुंचने में आधे से भी कम समय लगा। हालांकि मुझे मेरे काम में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, क्योंकि कुरियर सर्विस आदि नहीं चल रही थीं।
बंद की कहानी ईशा की जुबानी
सेल्स एग्जीक्यूटिव ईशा कहती हैं, रोज की तरह मैं सुबह 10 बजे घर से ऑफिस के लिए निकली। दिमाग में बातें चल रही थीं कि नवंबर का तीसरा दिन है। टार्गेट पूरा करने के लिए अभी से पूरी मेहनत करनी होगी। यही सोचते-सोचते 10 बजकर 10 मिनट पर लोकल अड्डे पहुंच गई। लोकल अड्डे से ऑटो लिया। ऑटो वाले ने कहा मैडम दोगुना किराया लगेगा। पंजाब बंद है, आगे जगराओं पुल से किसी को निकलने नहीं दे रहे। घूम कर जाना पड़ेगा। इसलिए पांच रुपए नहीं दस रुपए लगेंगे, बैठना है तो बैठिए नहीं तो पैदल ही जाइए।
10:30 बजे ऑफिस पहुंचना भी जरूरी था। मीटिंग में आज की स्ट्रेटजी डिस्कस होनी थी। इसलिए ऑटो में बैठ गई। हालांकि दिमाग में यही चल रहा है कि आज क्या काम हो पाएगा। अगर पंजाब बंद तो सारा कुछ बंद होगा। रास्ते में बंद मार्केट इस विचार को और पुख्ता कर रहे थे, कि शायद आज कुछ भी काम नहीं हो पाएगा। चाहे रास्ते में कोई ट्रैफिक नहीं था, लेकिन जगराओं पुल की जगह दमोरिया पुल से घूम कर आने के कारण काफी ज्यादा समय लगा। ऐसे में मुझे साफ हो गया कि आज ऑफिस जाने के बाद छुट्टी ही