भोपाल. रवींद्र भवन में चल रहे मप्र उत्सव में मंगलवार को प्रख्यात मोहन वीणा वादक विश्वमोहन भट्ट ने मोहन वीणा की प्रस्तुति दी।
हालांकि उनकी मोहन वीणा सुनने में शहर के कलाप्रेमियों ने खास उत्साह नहीं दिखाया और बमुश्किल 50 से 60 श्रोता ही परिसर में दिखे। जबकि उत्सव के पहले दिन गायक शान को सुनने शहर की जनता उमड़ पड़ी थी और परिसर में खड़े होने की जगह भी नहीं थी।
मप्र संस्कृति विभाग द्वारा मप्र के स्थापना दिवस पर मप्र उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मंगलवार को पहली प्रस्तुति विश्वमोहन भट्ट की रही। उन्होंने हेमखेम राग से प्रस्तुति का शुभारंभ किया।
इसमें उन्होंने आलाप, जोड़ झाला को विलंबित गत और द्रुत गत में त्रिताल में निबद्ध किया। लगभग एक घंटे उन्होंने वीणा की तान छेड़ी। इनके साथ तबला पर बनारस घराने के तबला वादक हिमांशु महंत ने संगत दी।
संगीत सभा को आगे बढ़ाते हुए अखिलेश गुंदेचा के नेतृत्व में कलाकारों ने ढोलक, मादल, मटका, तबला सहित अन्य वाद्ययंत्रों से मधुर प्रस्तुतियां दीं। मध्यलय मूलत: मप्र के कलाकारों का ऐसासमूह है जिसने देशभर में ताल वाद्य कचहरी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।
इस समूह में 9 प्रकार के वाद्य सारंगी के साथ मिलकर अपना-अपना संसार रचते हैं और अंत में सब एकाकार हो जाते हैं। कलाकारों ने प्रस्तुति की शुरुआत महाकाल की वंदना से की। इसके बाद तील ताल में उठानस पेशकर, कायदे, रैले पेश किए। संगीत सभा के आकर्षण का केंद्र रहा नौ वाद्यों का सवाल जवाब। अंत में सभी वाद्य एक साथ झनक उठे।
इसमें अमूप सिंह बोरलिया ढोलक, मादल, मटका, बंबू, हुडका पर, हिमांशु महंत तबला, मनोज बोरलिया डफ, सरवर हुसैन सारंगी, फारूख लताफ खां सारंगी, अखिलेश गुंदेचा पखावज पर थे।
कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति के रूप में नई दिल्ली की जानीमानी गायिका तृप्ति साक्या ने भक्ति संगीत पेश किया। उन्होंने ‘कभी राम बनके कभी श्याम बनके..’ भजन के साथ ही अन्य भजनों की प्रस्तुति दी।