लुधियाना. खूब मस्ती, एंज्वाय, कुछ अच्छी बातें सुनीं तो किसी को घर संभालने के मजेदार टिप्स दिए। यही नहीं यहां केवल घर को संवारने की ही बातें नहीं हुईं, बल्कि शहर को संवारने के लिए भी शहर की इन महिलाओं ने प्लानिंग बनाई। मौका था मंगलवार को दैनिक भास्कर कार्यालय में अंतरराष्ट्रीय हाउसवाइफ डे सेलिब्रेशन का। इसमें थी ढेर सारी मस्ती, फन। इसके अलावा सबसे बड़ी बात यह रही कि शहर की गृहणियों ने दैनिक भास्कर के संग अपने घरेलू सफर की बातें शेयर कीं। इस चर्चा में सभी के एक ही विचार सुनने को मिले कि उन्होंने अपने घर को पूरी जिम्मेदारी के साथ बखूबी संवारा है और अब शहर को संवारने के लिए कदम बढ़ा रही हैं।
इन महिलाओं ने कहा कि एक महिला चाहे तो क्या नहीं कर सकती। अगर वह पूरे घर को संभाल सकती है, क्लब की जिम्मेदारी को निभा सकती है, पति के बिजनेस में सहयोग कर सकती है तो शहर की समस्याओं को क्यों नहीं दूर कर सकती। इसी लक्ष्य को लेकर इन महिलाओं ने आज दैनिक भास्कर कार्यालय में अपनी एक एसोसिएशन भी बनाई और प्रण लिया कि अब वह घर के साथ-साथ शहर को संवारने का भी जिम्मा उठाएंगी। उनके इस नेक काम में दैनिक भास्कर ने भी उनका पूरा सहयोग देने का वादा किया है।
दूर करेंगे बुराइयों को
हाउसवाइफ व लेडीज क्लब की बोर्ड मेंबर्स मीना गिरहोत्रा और हरप्रीत गिल ने कहा कि आज की हाउसवाइफ ऑल राउंडर है। वह सभी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही है। अब वह केवल घर तक ही सीमित नहीं है। कई तरह के सोशल कार्यों में भी वह हिस्सा ले रही है। हमने अपने आज तक के घरेलू सफर में पूरी स्मार्टनेस दिखाई है। अब शहर में सामाजिक कार्यों के माध्यम से अपनी भागीदारी देंगे। सबसे पहले सभी मिलकर भ्रूण हत्या जैसे घिनौने अपराध को रोकने के लिए क्लब में ही महिलाओं को जागरूक करेंगी।
सोच को बदलना है
हाउसवाइफ नीलू कौड़ा ने कहा कि मेरी ज्वाइंट फैमिली है। पूरे परिवार को बखूबी संभाला है, जिसमें मेरे परिवार का भी पूरा सहयोग रहा है। अब जब बच्चे बड़े हो गए हैं, तो मेरे पास इतना समय तो बच ही जाता है कि मैं इसका फायदा ले सकूं। हमने आज जो एसोसिएशन बनाई है, उसमें जितना हो सकेगा सहयोग दूंगी, लेकिन सबसे पहले तो मेरा परिवार मेरे लिए प्रमुख है। जब उनसे पूछा गया कि किस तरह का बदलाव आप शहर में लाना चाह रही हैं तो उन्होंने बताया कि सबसे पहले तो लोगों की सोच को बदलना है। वहीं हाउसवाइफ रेशमा अग्रवाल ने कहा कि महिलाएं हर रोल अदा करती हैं परिवार के सब सदस्यों को खुश रखने के लिए। अगर वे ठान लें तो शहर को भी संवार सकती हैं।
करेंगे बैठक
हाउसवाइफ शम्मी बिंदरा ने कहा कि अब तक घर को संवारने के लिए काफी मेहनत की है। लेडीज क्लबों में भी महिलाओं को स्मार्ट हाउसवाइफ बनाने के लिए काफी कुछ वर्क किया है। अब इन महिलाओं के सहयोग से ही एक एसोसिएशन की आज यहां नींव रखी है। और अब हम सब शहर की स्थिति संवारने के लिए तैयार हैं।
इसके तहत अब हम निगम अधिकारियों को अपनी मीटिंग में बुलाएंगे। शहर को संवारने में उनसे सहयोग मांगेंगे। सहयोग मिला तो ठीक नहीं तो हम सड़क पर उतरकर प्रदर्शन भी करेंगे। गीतू साही ने भी हामी भरी और कहा कि अगर हम एक जुट होकर भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाएं तो काफी कुछ बदल सकता है। सुनैना ने कहा कि किसी न किसी को तो लीड करना ही होगा। इसी बात को जारी रखते हुए मीनू अग्रवाल भी बोल उठीं कि अपने घर की ड्राइविंग तो फास्ट और सेफ की है। बच्चों को संभाला है, पति को भी बिजनेस में पूरा सहयोग दिया है।
न सैलरी न कोई छुट्टी
घरेलू महिला की ड्यूटी तो ऐसी है, जिसमें न तो सैलरी मिलती है और न ही कोई छुट्टी। फिर भी हर काम को फर्ज और प्यार से हम निभाती आई हैं। हाउसवाइफ रीमा ढंड ने ये बात कही। उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य को लेकर तो मैं पूरी सतर्क हूं। इसी बीच मीना गिरहोत्रा ने कहा कि हमारी ड्यूटी तो ऐसी है कि छुट्टी का सवाल ही नहीं।
इस चर्चा में हाउसवाइफ सरिता अग्रवाल ने कहा कि मेरे लिए सबसे पहले मेरा परिवार है। इसके बाद ही खाली समय में शहर को संवारने के लक्ष्य को पूरा करने में अपना योगदान दूंगी। किरण सूद के विचार भी तो कम नहीं थे। किरण ने कहा कि घर को गुड एंड बेस्ट चलाने के लिए घर के सदस्यों का सहयोग होना बेहद जरूरी है। आज मैं जिस बखूबी से अपनी गृहस्थी को चला रही हूं इसमें मुझे सीख तो मेरी सासू मां ने ही दी है। रही बात समाज को बदलने की तो इसमें भी महिलाओं का ही अधिक योगदान रहा है।
नहीं भूलें संस्कार
हाउसवाइफ आशा सेठी ने कहा कि आज चाहे जितनी भी चेंज आ गई हो, संस्कारों को नहीं भूलना चाहिए। घर संसार की मजबूत नींव तो इन संस्कारों पर ही तो टिकी है। मेरी तीनों बेटियों के ससुराल वाले जब मेरी बेटियों की तारीफ के पुल बांधते हैं तो गर्व से सिर उठ जाता है। ऐसे संस्कार देने में अहम रोल मां का ही होता हैं।
नहीं हैं हम किसी से कम
हाउसवाइफ नीरू भल्ला ने कहा कि हर पुरुष की तरक्की के पीछे किसी न किसी महिला का ही हाथ होता है। चाहे वह महिला मां के रूप में हो, बहन के रूप में हो या फिर पत्नी के रूप में। आज की हाउसवाइफ भी किसी प्रोफेशनल महिला से कम स्मार्ट नहीं है। हम ठान लें तो क्या नहीं कर सकती। मेरे दो बेटे हैं दोनों आर्मी आफिसर हैं। अब तक का समय घर का फ्यूचर संवारने में लगाया है। अब शहर को भी संवारने में हाथ बटाएंगीं।