चंडीगढ़. ‘देश के उच्च शिक्षण संस्थान अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रोफेशनल तैयार नहीं कर पा रहे हैं। नए शिक्षण संस्थानों पर ज्यादा धनराशि खर्च करके, ज्यादा लोगों को उच्च शिक्षा देकर भी हम अंतराष्ट्रीय स्तर की जरूरतों के मुताबिक गुणवत्ता नहीं दे पा रहे हैं।’ मंगलवार को पंजाब यूनिवर्सिटी में आयोजित विशेष दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने यह बात कही। इस मौके पर पीयू ने उन्हें डॉक्टरेट ऑफ लॉ की मानद उपाधि से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में नए आईआईएम, आईआईटी और सेंट्रल यूनिवर्सिटी खोले जा रहे हैं, लेकिन योग्य शिक्षकों की कमी खल रही है।
उच्च शिक्षा में अभी बहुत पीछे
प्रधानमंत्री ने देश की आर्थिक विकास दर को बनाए रखने के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में असंतुलन को दूर करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देश में आज भी महज 12 फीसदी लोग ही उच्च शिक्षा हासिल कर पाते हैं, जबकि विकसित देशों में यह दर 70 फीसदी है। यहां तक कि दक्षिण एशिया में भी यह दर 20 फीसदी है। डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि देश में उच्च शिक्षा के आधे से ज्यादा संस्थान सिर्फ पांच राज्यों में हैं। इस क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करके ही हर वर्ग को उच्च शिक्षा से जोड़ा जा सकता है।
नए शिक्षकों को बेहतर पैकेज
प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार की ओर से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उठाए गए कदमों को आने वाले दिनों में लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने उच्च शिक्षा में सुधार के लिए गठित प्रो. यशपाल कमेटी और नेशनल नॉलेज कमीशन के प्रस्तावों को जल्द लागू करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए सेमेस्टर और क्रेडिट सिस्टम लागू करने के अलावा कई दूसरे कारगर कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में योग्य शिक्षकों की जरूरत को पूरा करने के लिए अब नए शिक्षकों को बेहतर पैकेज पर नियुक्त किया जा रहा है।
पीयू की तारीफ
शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए यह गर्व की बात है कि उनकी पढ़ाई यहां हो रही है। इस मौके पर पीयू के वीसी प्रो. आरसी सोबती ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह ने साबित किया है कि किस तरह एक शिक्षक देश के नीति निर्धारण में अहम योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पीयू के विकास के लिए हमेशा सहयोग किया है, लेकिन बढ़ती जरूरतों को देखते हुए भविष्य में और मदद की जरूरत है। प्रो. सोबती ने उम्मीद जताई कि पीयू देश में नंबर वन यूनिवर्सिटी बनने के अपने लक्ष्य को हासिल करके रहेगी।
सेंट्रल यूनिवर्सिटी पर रहे चुप
चंडीगढ़x प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए पीयू की पीठ थपथाई, हर संभव मदद का भरोसा भी दिया, लेकिन उस मुद्दे पर चुप रहे जिस पर पीयू के विद्यार्थी व शिक्षक सबसे ज्यादा उम्मीद लगाए बैठे थे। उनके चुप्पी ने संकेत दे दिया कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी के दर्जे के लिए अभी पीयू को लंबा संघर्ष व सफर तय करना होगा। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने इस संबंध में प्रधानमंत्री को ज्ञापन भी दिया, पर अपनी राजनीतिक विवशता के चलते उन्होंने एक भी ‘शब्द’ नहीं कहा। दीक्षांत समारोह में पीयू के वीसी प्रो. आरसी सोबती ने पीयू की माली हालत का जिक्र भी किया। वीसी ने सीधे सेंट्रल यूनिवर्सिटी की बात तो नहीं की, पर पीयू के लिए लगातार मदद की बात कहकर उन्होंने संकेत दिया कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा ही संस्थान को संकट से निकाल सकता है। पुटा और पीयू स्टूडेंट्स काउंसिल ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा है।
डॉक्टरों को डिग्री,गोल्ड मेडल
प्राइवेट सेक्टर में पैसा जरूर ज्यादा है, लेकिन किसी गरीब मरीज का इलाज करने से एक डॉक्टर को जो संतुष्टि का अहसास होता है वह नहीं मिलता। आप जहां भी जाओ इस विजन को मत भूलना। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद ने मंगलवार को पीजीआई के दीक्षांत समारोह में डॉक्टरों को संबोधित करते हुए यह बात कही।
दीक्षांत समारोह में 361 छात्रों व डॉक्टरों को डिग्रियां और मेडल दिए गए। आजाद ने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है, इसलिए इसी सत्र से देश भर के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में चार हजार सीटें बढ़ा दी गई हैं। अगले दो सालों में सात हजार सीटें बढ़ाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि ऐसा होने से मरीजों को बेहतर चिकित्सक और चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।
पीजीआई के निदेशक प्रो. केके तलवार ने कहा कि पीजीआई मरीजों की सेवा करने में सदैव आगे रहा है। यहां पर एडवांस कार्डियक सेंटर, आई सेंटर व एडवांस यूरोलॉजी सेंटर में देशभा के मरीजों का इलाज होता है।
इनको मिले गोल्ड मेडल
डॉ. सौरभा दत्ता को मेजर जनरल अमीर चंद गोल्ड मेडल
डॉ. गेहलानी सुनील जिवराजभाई को वीके सैनी गोल्ड मेडल
डॉ. विजय कुमार को डॉ. आर. नाथ गोल्ड मेडल
डॉ. कुणाल को द कटारिया मेमोरियल गोल्ड मेडल
डॉ. पाटिल विजय मारुती को द कटारिया मेमोरियल गोल्ड मेडल
राजिन्दर प्रसाद जोशी को आइकत मेमोरियल गोल्ड मेडल