दैनिक भास्कर ने गृहिणियों के साथ मनाया ‘हाउस वाइफ डे’
भास्कर न्यूज Wednesday, November 04, 2009 18:58 [IST]  

WDay चंडीगढ़. वे मकान को घर बना देती हैं, दीवारों से रिश्ता कायम करती हैं और सारे घर के लोगों को इस तरह एकसाथ जोड़ देती हैं मानों सब एक धागे से बंधे हैं। ये मकान को घर को बनाने वाली हाउस-वाइफ यानी होममेकर। 3 नवंबर का दिन दुनिया भर में इनके नाम रहता है। दैनिक भास्कर के दफ्तर में यह दिन मनाया गया शहर की कुछ ऐसी महिलाओं के साथ जिन्होंने अपनी मेहनत, समर्पण और सदभाव से घर बना दिया है स्वीट होम- हैरानी की बात यह है कि इस चर्चा में हिस्सा लेने वाली डॉ. मंगला डोगरा, एनी अरोड़ा, सुमन बिंदलीश, कल्पना, मंजू, डॉ. राजश्री सारडा, शैली तनेजा, मंजू भल्ला और नीतू सेठिया..अलग-अलग सबके जीवन और घर संसार अलग हैं, तो भी वे जब घर के बारे में बात करती हैं तो सबमें नजर आते हैं एक कुशल प्रशासक, सफल मैनेजर और किसी सीईओ के गुण।



घर चलाना आसान काम है..



ऐसा मानने की गलती बिलकुल न करें। अच्छे-अच्छे मैनेजर जिन सिचुएशन्स को हैंडल न कर पाएं, घर की मालकिन उसे चुटकियों में हल कर देती हैं। सारे रिश्तों को जोड़कर रखना, बच्चों की परवरिश करना, पति की हमकदम बनकर चलना और कभी अपने करियर की चुनौतियों का मुकाबला करना तो कभी परिवार की अन्य समस्याओं का..ये सब कर लेती हैं वे बिना किसी ऐसी औपचारिक शिक्षा के जिसके लिए घरवालों ने लाखों खर्च किए हों। इंटरनेशनल हाउस-वाइफ डे के मौके पर शहर की कुछ महिलाओं ने बताया कि वैसे वे कर पाती हैं ऐसा जादू जिससे सब रहें काबू..।



सबसे मुश्किल काम है महिलाओं के लिए यह साबित करना कि भई घर चला रहे हैं तो इसे भी फुलटाइम काम समझिए, ये कोई ऐसी चीज नहीं है कि महीने की तनख्वाह दो और आराम से हो जाए। शहर की मशहूर गायनाकोलॉजिस्ट डॉ. मंगला डोगरा कहती हैं-होममेकर होना अपने आप में बहुत थैंकलैस काम है। इसकी कोई तनख्वाह नहीं, कोई शुक्राना नहीं बस, किए जाओ..किए जाओ का फंडा चलता रहता है। लेकिन मैं इस मामले में काफी खुशकिस्मत रही हूं।



मेरा सफल करियर और सुखी जीवन सबमें पति का सहयोग शामिल है। मेरे बत्तीस बरस के शादीशुदा जीवन में ऐसा कोई दिन नहीं आया जब उन्होंने मुझे किसी बात के लिए परेशान किया हो। इस तरह का सहयोग और साथ मिले तो औरत के लिए घर चलाना आसान हो जाता है। सच है डॉ. मंगला की बात लेकिन पति अगर समस्याओं से जूझ रहे हों तो पत्नी का सब्र, साहस और संयम ही परिवार को बचा पाता है, और ऐसा ही कमाल करके दिखाया है एनी अरोड़ा ने। वे इन दिनों होममेड चॉकलेट्स का बिजनेस कर रही हैं जिसे जमाने से पहले उन्होंने जीवन के खासे-उतार चढ़ाव देखे और पूरी हिम्मत से सारी स्थितियों में पति का साथ देते हुए आज पूरे परिवार को सशक्त स्थिति में पहुंचाया।



वे कहती हैं-मैंने पति के साथ उनके बिजनेस में भी हाथ बंटाया लेकिन कई जगहें बदलने और हालात के भी बदल जाने के बाद मैंने अपना काम भी शुरू किया है। इसमें मुझे परिवार का सहयोग भी मिल रहा है और साथ ही ऐसा आत्मविश्वास भी जिसे व्यक्त करना संभव नहीं। तो हिम्मत और आत्मविश्वास ऐसी दो चीजें हैं जो होममेकर्स के अचूक हथियार हैं। इनके बल पर वे बुरी से बुरी स्थिति को भी अपने अनुकूल बना लेती हैं और एक दिन दुनिया को उनके कदमों में झुकना ही पड़ता है।




जीवन में जब सबकुछ हो, आजीविका के लिए किसी संघर्ष की जरूरत न हो तो समाज के प्रति अपने कर्तव्य का पालन भी करना चाहिए। अपने स्वीट होम में चार चांद लगाने वाली मंजू भल्ला का जीवन उदाहरण है उन सबके लिए जो समाज को भी अपने परिवार का विस्तृत रूप मानती हैं। अनेक सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी मंजू भल्ला का बेटा एक होनहार और नामी वकील है। वे समाजसेवा करती हैं और अब उसी क्रम में उन्होंने जॉइन की हैं लॉ क्लासेज।



जब बच्चे सैटल हो गए हों और परिवार की गाड़ी फर्राटे से दौड़ रही हो तो क्या जरूरत पड़ी है लॉ करने की? वे जवाब देती हैं- मुसीबत में फंसे लोगो की मदद का बीड़ा उठाया है। इन लोगों को अक्सर कानूनी मदद की जरूरत पड़ती है, इनके पास पैसा नहीं होता इसके लिए, यहीं से प्रेरणा मिली मुझे कि मैं लॉ करूं और इन्हें कानूनी मदद दे सकूं।



घर, परिवार, समाज से लेकर मन की परतों तक की पड़ताल करती हैं मनोवैज्ञानिक और सफल होममेकर राजश्री सारडा। उनका कहना है- परिवार को सफल और सुखी रखना है तो बहुत सारी व्यवस्था इस तरह करनी पड़ती है कि घर और बाहर सब ठीक चलता रहे। सबसे ज्यादा जरूरी है उस संतुलन का बना सकना जिसमें आप सब जगह न्याय कर सको। यानी बात घूम-फिरकर वहीं आती है कि घर चलाने के लिए महिलाओं को पुरुषों से कहीं ज्यादा शारीरिक श्रम, मानसिक संतुलन और बौद्धिक जागृति की आवश्यकता होती है। इनके सबके चलते ही वे अपने परिवार को मजबूती देकर बच्चों का भविष्य बनाने में मदद करती हैं और साथ ही पति और परिवार की अन्य जरूरतों का ध्यान रखते हुए खुद अपने विकास पर भी पूरा ध्यान।

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