पीएम सुरक्षा की भेंट चढ़ा आम आदमी
राजधानी हरियाणा। जिस वक्त प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पीजीआई चंडीगढ़ में चिकित्सकों और कर्मियों को मरीजों की सेवा करने की नसीहत दे रहे थे, उस वक्त पीजीआई गेट पर ही एक आम आदमी मौत से जूझ रहा था। पीएम की सुरक्षा का हवाला देते हुए सुरक्षाकर्मी अंबाला के सुमित प्रकाश को एक से दूसरे गेट पर घुमाते रहे। इस बीच उसकी हालत बिगड़ती गई और अंतत: गेट पर ही उसने दम तोड़ दिया। सुमित के परिजन कभी पीएम दौरे को कोसते तो कभी उनकी सुरक्षा के लिए गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को।
पीएमओ ने मांगी रिपोर्ट
पीजीआई में पीएम दौरे के दौरान मरीज की मौत की पर खेद जताते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में चंडीगढ़ प्रशासन से जांच रिपोर्ट मांगी है।
क्या हुआ ?
अंबाला कैंट के सुमित प्रकाश वर्मा (32) के किडनी का इलाज चल रहा था। डायलिसिस के लिए वह हर हफ्ते सेक्टर-35 स्थित इंद्रजीत अस्पताल जाता था। सांस में तकलीफ पर परिजन मंगलवार सुबह उसे अस्पताल ले गए। जांच के बाद डॉक्टर ने कहा कि सुमित को वेंटीलेटर की जरूरत है। पीजीआई जाकर ऑक्सीजन लगवा लें। तत्काल उसे पीजीआई ले जाया गया।
दौड़ाते रहे
गेट नं-1 से जब परिजन उसे इमरजेंसी वार्ड में ले जाने लगे तो पीएम की सुरक्षा के लिए तैनात सुरक्षाकर्मियों ने गेट पर ही कार रोक दी। सुमित के भतीजे धीरज वर्मा ने बताया कि सुमित की पत्नी ऋचा रोती रही, हाथ जोड़कर मिन्नतें करती रही कि उन्हें इमरजेंसी में जाने दिया जाए, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने कार पर डंडा बरसाते हुए उन्हें गेट नं-2 पर भेज दिया। यहां भी उनके साथ यही सलूक हुआ और फिर गेट नं-1 पर भेज दिया। यहां से फिर वहां। इसी दौरान करीब एक बजे सुमित ने दम तोड़ दिया।
मौत के बाद जागे
सुमित की मौत के बाद जब परिजन चिल्लाने लगे तो उन्हें गेट नं-2 से जाने की अुनमति दी गई। लेकिन पहले ही देर हो चुकी थी। धीरज ने पीजीआई प्रशासन के खिलाफ पुलिस शिकायत में कहा है कि यदि समय पर सुमित को ऑक्सीजन मिलता तो वह बच जाता। बकौल धीरज पीएम का दौरा तय था तो मरीजों के इलाज की भी समुचित व्यवस्था होनी चाहिए थी।
एक और तड़पता रहा
उधर, इमरजेंसी में भर्ती रोहतक का जय भगवान भी नौ घंटे से अधिक समय तक तड़पता रहा, लेकिन किसी ने उसकी सुध नहीं ली। उसे मंगलवार तड़के चार बजे दाखिल किया गया था। उसके दिमाग की नस फट गई थी। अस्पताल कर्मचारी पीएम दौरे में व्यस्त रहे और एक बजे तक उसका कार्ड ही नहीं बना। परिजनों का कहना है कि नौ घंटे बाद भी उसे प्राथमिक चिकित्सा तक मुहैया नहीं कराई गई।










