मुंबई. महाराष्ट्र के कार्यवाहक मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने राज्य में 48 घंटे के भीतर नई सरकार के गठन का भरोसा दिलाया है। इससे पहले, राज्यपाल एससी जमीर ने कांग्रेस और एनसीपी नेताओं से जनादेश का सम्मान करते हुए जल्द से जल्द नई सरकार का गठन करने को कहा था।
चुनाव नतीजे आने के 14 दिन बाद भी नई सरकार न बनते देख भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। इस बीच, एनसीपी नेता और केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने सरकार गठन को लेकर जारी गतिरोध के गुरुवार तक खत्म हो जाने की उम्मीद जताई है।
बुधवार को राज्य मंत्रालय में तीन बैठकों के बाद अशोक चव्हाण ने कहा, ‘कांग्रेस-एनसीपी नेताओं के बीच दिल्ली में चर्चा जारी है और विभागों के बंटवारे को लेकर जल्द ही आम सहमति बन जाएगी।’
मसला सुलझने की ओर
प्रफुल्ल पटेल ने नागपुर में संवाददाताओं से कहा, ‘विभागों के बंटवारे को लेकर कोई विवाद नहीं है। कुछ फैसले चर्चा के माध्यम से लिए जाने की कोशिश की जा रही है।’ हालांकि, पटेल ने माना कि फैसला लेने में देरी हो रही है, लेकिन उन्होंने कहा कि अब सभी उलझनें सुलझ रही हैं। गुरुवार तक स्थिति पूरी तरह से साफ हो जाएगी और नई सरकार शपथ लेगी।’ मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे पर चर्चा के लिए एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से चर्चा करने के लिए पार्टी विधायक दल के नेता छगन भुजबल, पार्टी के राज्य अध्यक्ष आरआर पाटिल और अजित पवार दिल्ली रवाना हो गए हैं।
राष्ट्रपति शासन लगाएं
शिवसेना-भाजपा के प्रतिनिधिमंडल की राज्यपाल से मुलाकात के बाद भाजपा विधायक दल के नेता एकनाथ खडसे ने कहा कि नई सरकार न बनने से कई फैसले रुके हुए हैं, जिससे किसान परेशान हैं। मुंबई के नए पुलिस महानिदेश की नियुक्ति भी लंबित है। ऐसे में यदि तुरंत नई सरकार का गठन नहीं होता है, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए।
थर्ड फ्रंट को समर्थन दें : आठवले
आरपीआई अध्यक्ष रामदास आठवले ने कांग्रेस-एनसीपी को रिपब्लिकन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी तीसरे मोर्चे को समर्थन देने का सुझाव दिया है, ताकि महाराष्ट्र में धर्मनिरपेक्ष सरकार का गठन हो सके।