Ambala
‘पैसा नहीं मुझे मेरा पति चाहिए’
भास्कर न्यूज Thursday, November 05, 2009 00:55 [IST]  

victimअम्बाला.   मृतक वर्मा परिवार के घर संवेदनाएं व्यक्त करने डीसी समीरपाल सरो बुधवार शाम पहुंचे। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जारी दो लाख रुपए का चेक जब मृतक की पत्नी ईशा वर्मा को सौंपा तो उनकी आंखों से आंसू झलक गए।

रुद्र आवाज में ईशा ने कहा कि पैसे नहीं मुझे मेरा पति चाहिए। परिजनों ने ईशा को संभाला जिसके बाद ईशा ने कहा कि परिवार का गुजर बसर करने के लिए सरकार उन्हें नौकरी या कुछ अन्य सुविधाएं दे।

डीसी समीरपाल सरो ने सीएम राहत कोष से जारी दो लाख रुपए का चेक मृतक 35 वर्षीय सुमित प्रकाश वर्मा की पत्नी ईशा वर्मा को सौंपा। उन्होंने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जिला प्रशासन मृतक के दोनों बच्चों की स्कूल की फीस 10वीं तक माफ कराने का प्रयास करेगा। डीसी सरो ने कहा कि परिवार सदस्यों की यदि कोई और मांग है तो वह इसे लिखित तौर पर प्रशासन को दें ताकि इस मांग को राज्य सरकार को भेजा जा सकें।

बता दें कि मृतक के परिजनों ने बच्चों की स्कूल की पढ़ाई का खर्च उठाने के साथ-साथ मृतक की पत्नी ईशा वर्मा को भी सरकारी नौकरी देने की मांग की है। उनका कहना था कि सुमित वर्मा जेवरों का कारीगर था और मुश्किल से ही घर की रोजी-रोटी चलती थी। सुमित का इलाज चलने के कारण घर आर्थिक तौर पर तंग हाली में आ गया था। अब सुमित की मौत के बाद घर का खर्च चलाने वाला कोई नहीं है।

रामबाग में हुआ संस्कार

दोपहर लगभग 12 बजे शव खुमरान मोहल्ले में पहुंचे जिसके बाद मोहल्ले में मृतक को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। सुनार बाजार के दुकानदारों के अलावा अन्य बाजारों के लोगों ने संवेदनाएं व्यक्त की। शव ले जाने से पहले मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। लगभग एक बजे मृतक का संस्कार रामबाग में किया गया। अंतिम संस्कार के दौरान शहर के भारी संख्या में लोग माजूद रहे।

पीजीआई ने देरी से दिया शव

परिजनों का आरोप था कि पीजीआई प्रशासन बार-बार उनसे यह बयान लिखवाने के लिए मजबूर कर रहा था कि पीजीआई की गलती से मरीज की मौत नहीं हुई। इस वजह से देर रात तक शव उन्हें नहीं सौंपा गया। उन्होंने शव लेने के लिए यह लिखकर भी दे दिया, मगर बावजूद इसके रात 10 बजे उन्हें बताया कि पोस्टमार्टम होना जरूरी है। इस वजह से शव उन्हें बुधवार सुबह सौंपा गया। उन्होंने बताया पीजीआई अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थी।

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