हमीरपुर. नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के दिशा—निर्देशों के तहत प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों को वर्ष 2012 तक अनिवार्य रूप से इंटरनेशनल स्टैंर्डड आर्गेनाइजेशन (आईएसओ) से प्रमाण पत्र लेना होगा। देश में अभी केवल गुजरात के सभी जिला अस्पतालों के पास आईएसओ का दर्जा है।
सीएमओ को दिए दिशा-निर्देश
अगले तीन सालों में चरणबद्ध तरीके से मुख्य अस्पताल इसके तहत लिए जाएंगे। आईएसओ के मापदंड पूरा करने के दिशा-निर्देश संबंधित जिलों के सीएमओ दिए जा रहे हैं ताकि वह तय समय में औपचारिकताएं पूरी कर सके। आईएसओ दर्जा हासिल करने की दौड़ के बहाने जिला अस्पतालों में सुविधाओं का इजाफा होगा। क्वालिटी सर्विस के साथ सुविधाएं जुटने से आम मरीज को इसका फायदा होगा। इन मापदंडों को पूरा करने के लिए अगले दो से तीन साल का समय दिया गया। कुछ अस्पतालों ने इस प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। मिशन का उद्देश्य जिला अस्पतालों में स्वास्य सेवाओं को और बेहतर बनाना है। इसके लिए केंद्र सरकार से विशेष बजट मिलेगा।
इन मापदंडों पर होगी जिला स्तर पर परख
अस्पतालों को आईएसओ दर्जा हासिल करने के लिए मापदंडों को लेकर करीब 1800 प्वांइटस की निर्देशिका तैयार की गई हैं। इसमें हर छोटी से लेकर बड़ी सुविधा को शामिल किया गया है। मुख्यत: जिन चीजों पर खास फोकस कर सुविधाएं जुटाई जाएंगी।
उनमें उपलब्ध स्टाफ, पब्लिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम, वार्डो की स्थिति आधुनिक उपकरण वाहनों की स्थिति, दवाइयां, मरीजों के इलाज का तरीका, सेवा क्वालिटी से कितनी संतुष्टि वरिष्ठ नागरिकों का उपचार किस तरह, साफ-सफाई जैसे तमाम मापदंड आईएसओ नुमांइदों की ओर से अस्पतालांे मंे विजिट कर परखे जाएंगे। इसी रिपोर्ट के आधार पर आईएसओ का दर्जा मिलेगा।
प्रदेश में जिला अस्पतालों को आईएसओ का दर्जा मिलेगा। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। 2012 तक इस उपब्धियों को हासिल करने का लाभ दिया गया है। मिशन के तहत जिला अस्पतालों की स्थिति को और बेहतर बनाया जाएगा।
डॉ. हरदयाल चौहान, ओएसडी, नेशनल रूरल हेल्थ मिशन, स्वास्थ्य विभाग, शिमला
प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं जुटाई जा रही हैं। इनके जुटने के बाद आईएसओ की तरफ कदम बढ़ाए जाएंगे। आईएसओ दर्जा मिलता है, तो इससे निश्चित तौर पर क्वालिटी सर्विस को पहचान मिलेगी।
डॉ. योगेश वर्मा, निदेशक स्वास्थ्य विभाग