प्लास्टिक पैकिंग पर पाबंदी की तैयारी
मुकेश शर्मा Thursday, November 05, 2009 01:30 [IST]  

शिमला. प्रदेश में पॉलीथिन के कैरी बैग प्रतिबंधित होने के बाद केंद्र सरकार ने बड़े स्तर पर पॉलीथिन के उपयोग पर रोक लगाने का फैसला किया है। प्रदेश सरकार को इस बारे में केंद्र से पत्र मिल चुका है। पत्र में प्रदेश सरकार से इस बारे में आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं।



केंद्र सरकार ने शैंपू, गुटखा, पान मसाला, नमकीन, बिस्कुट, टॉफी और इस प्रकार के अन्य पैकिंग वाले खाद्य पदार्थो के लेमिनेटिड प्लास्टिक और मैटेलिक पाउचों पर पाबंदी लगाने का प्रस्ताव पेश किया है। प्रदेश सरकार पहले ही पॉलीथिन कैरी बैग्स के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा चुकी है। प्रदेश में अभी



पॉलीथिन इस्तेमाल में केवल 2 फीसदी की कमी आई है। अगर केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव पर स्वीकृति की मोहर लग जाती है तो प्रदेश में प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण में 25 से 30 फीसदी की कमी आएगी।



पैकिंग में 90 फीसदी प्लास्टिक



पर्यावरण रक्षा के लिए बनी समिति ने रीसाइकल न होने के कारण मल्टीलेयर्ड और मैटेलिक पाउचों पर पाबंदी की मांग की थी। ठोस अवशेष के रूप में यह पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। प्रतिदिन आने वाली दूध की थैलियां, शराब के पाउच और पैकिंग में आने वाले अन्य सामान से पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। पैकेजिंग में आज भी 90 फीसदी इस्तेमाल प्लास्टिक का है। केंद्र सरकार के इस निर्णय से हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण प्रदूषण से भारी राहत मिलने की संभावना है।



यह सब हो सकता है बैन



पर्यावरण मंत्रालय ने प्लास्टिक (उत्पाद, उपयोग, और अवशिष्ट) प्रबंधन नियम 2009 के प्रारूप मसौदे में इस तरह के प्रस्ताव शामिल करने पर विभिन्न भागीदारों से प्रतिक्रियाएं मांगी हैं। नियम के प्रारूप में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति नॉन रीसाइकलेबल लेमिनेटिड प्लास्टिक, मैटेलिक पाउच या मल्टीलेयर्ड पैकेजिंग का निर्माण, भंडारण और बिक्री नहीं करेगा। इसमें केवल ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड के मानकों पर खरे उतरने वाले बायो—डीग्रेडेबल प्लास्टिक और फिल्म से बने मल्टीलेयर्ड पैकेजिंग को ही अनुमति देने की बात कही गई है।



दिसंबर तक मांगी राय



केंद्र सरकार के इस प्रस्तावित नियम के बारे में आम जनता और उद्योग जगत से जुड़े विभिन्न लोग दिसंबर के अंत तक अपनी राय भेज सकते हैं। अगर इस नियम को मंजूरी मिल जाती है तो विभिन्न एफएमसीजी और फूड प्रोसेसिंग फर्मो को ईको—फेंड्रली पैकेजिंग सामग्री का उपयोग करना होगा। इससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान में काफी कमी आएगी।

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