शिमला. वनों की रक्षा न करने वाले लोगों को अब टीडी (टिंबर डिस्ट्रीब्यूशन) अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी न निभाने वाले लोगों को टीडी के तहत इमारती लकड़ी नहीं दी जाएगी।
टीडी पॉलिसी 2009 में यह संशोधन हो जाने से लोग अब अपनी जिम्मेदारी में कोताही नहीं बरत सकेंगे। एक बार अधिकार से वंचित हो जाने पर दस साल बाद ही फिर से यह अधिकार मिल सकेगा। सरकार ने इस संबध में अधिसूचना जारी कर दी है। प्रदेश में इस समय लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये की वन संपदा आंकी गई है।
प्रदेश सरकार वन विभाग के सहयोग से राज्य में हरित आवरण को बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू कर बढ़ाने का प्रयास कर रही है और कुछ हद तक इस लक्ष्य को प्राप्त करने में कामयाब भी रही है। रिपोर्टो के अनुसार में प्रदेश के हरित आवरण में वृद्धि हुई है। प्रदेश सरकार के इन प्रयासों को सबसे बड़ा झटका तब लगता है, जब वनों में आग लगने जैसी घटनाओं से करोड़ो रुपए की वन संपदा स्वाह हो जाती है। ऐसी घटनाओं को रोकने में स्थानीय लोगों की भी अहम भूमिका हो सकती है, लेकिन लोग इसमें लापरवाही बरतते हैं। कई जगह लोग खुद जंगलों में आग लगाते हैं।
इसी तरह किसी व्यक्तिकी वन बंदोबस्त रिपोर्ट में किसी वन अपराध में संलिप्तता पाई जाती है तो उस स्थिति में भी उसका टीडी का अधिकार दस वर्षो तक छिन जाएगा। वन मंत्री जेपी नड्डा का मानना है कि टिंबर डिस्ट्रीब्यूशन राइट में संशोधन करने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वनों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार बनाना है। संशोधन में वनों की आग को बुझाने, वन अपराधियों को पकड़ने में मदद न करने वाले और अन्य वन अपराधों में संलिप्त रहने वाले लोगों के टीडी अधिकारों को दस वर्ष तक छीने जाने का प्रावधान नई पालिसी में किया गया है।