Jaipur
1400 करोड़ का नुकसान
Bhaskar News Thursday, November 05, 2009 02:40 [IST]  

जयपुर. सीतापुरा के उद्योगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर करीब 1400 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इनमें सबसे अधिक प्रभावित गारमेंट, फूड, जैम एंड ज्वैलरी और हैंडीक्राफ्ट फैक्ट्रियां हैं। उद्योगपतियों ने राहत पैकेज को नाकाफी बताते हुए अब एक साल के लिए टैक्स में छूट की मांग की है। इंडियन ऑयल टर्मिनल के आसपास की कई फैक्ट्रियां तो पूरी तरह खाक हो गई हैं।



राहत पैकेज एक प्रतिशत भी नहीं : उद्योगपतियों को हुए नुकसान के लिए केन्द्र व राज्य सरकार ने जो राहत पैकेज दिया है उसे उद्योगपतियों ने नाकाफी बताया है। उनका कहना है कि केन्द्र सरकार ने 50 करोड़ रुपए का राहत पैकेज मंजूर किया है। राज्य सरकार ने भी उद्योगों को कर्ज वसूली स्थगित, बिजली के बिलों में छूट देकर राहत दी है लेकिन ये 1400 करोड़ के नुकसान का एक प्रतिशत भी नहीं है। अकेले जीनस पावर इंडस्ट्रीज में सौ करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। इसकी दो यूनिट तो पूरी तरह बिखर गई हैं।



ऑटोलाइट इंडस्ट्रीज के निदेशक आदर्श एमपी गुप्ता का कहना है कि इस हादसे ने उनके यहां रखा तैयार और कच्च माल, फैक्ट्री की मशीनें खराब कर दीं। प्रत्यक्ष तौर पर करीब सवा करोड़ और अप्रत्यक्ष डेढ़ करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इसी तरह परिशुद्ध फाइब्रस लिमिटेड में टीन शैड में लगी चद्दरें टूट गई, मशीनों पर लगे कंट्रोल सिस्टम दूर तक जाकर गिरे।



पांच सौ करोड़ का पैकेज मांगा: सीतापुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष सत्यनारायण काबरा का कहना है कि उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए कम से कम 500 करोड़ का राहत पैकेज तुरंत दिया जाना चाहिए। सरकार वास्तव में उद्योगों की मदद करना चाहती है तो उत्पाद कर, सेवा कर अथवा आयकर में छूट दी जानी चाहिए।



सीजन चौपट होने की आशंका : उद्योगपतियों को आशंका है कि सरकार का राहत पैकेज मिलने के बाद भी स्थिति सामान्य होने में कम से कम दो से तीन महीने तो लगेंगे। ऐसे में व्यापार का सीजन प्रभावित हो सकता है। क्रिसमस और नया साल होने के कारण इस समय गारमेंट, जैम एंड ज्वैलरी, हैंडीक्राफ्ट सभी के पास अच्छे खासे आर्डर बुक हैं। समय पर आर्डर पूरे नहीं करने के कारण उनके बायर्स के टूटने का भी खतरा बना हुआ है।



फैक्ट्रियों में तकनीकी समिति की जांच जारी



सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों की तकनीकी जांच के बाद ही इन में उत्पादन शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से फैक्ट्रियों की तकनीकी जांच करवाई जा रही है। जिला कलेक्टर कुलदीप रांका ने बताया कि उद्योगों के भवनों व विद्युत सुरक्षा जांच के लिए गठित तकनीकी समिति ने आधे उद्योगों की जांच कर ली है। अधिकांश भवन तकनीकी रूप से सही पाए गए हैं। जहां विद्युत वायरिंग में गड़बड़ी है। उन्हें तकनीकी खामियां पूरी करने के बाद ही उत्पादन शुरू करने के लिए कहा गया है।



औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ी चहल-पहल



बुधवार को सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में चहल पहल बढ़ गई। विभिन्न इकाइयों, व्यापारिक फर्मो, कॉलेज व अन्य संस्थानों में उद्योगपतियों तथा उनके कर्मचारियों की आवाजाही शुरू हो गई। कई इकाइयों में मरम्मत शुरू करा दी गई है। उद्योगपतियों का कहना है कि उनके पेंडिंग ऑर्डर्स के कारण उन्हें रोज करोड़ों का नुकसान हो रहा है। जिनके ऑर्डर पेंडिंग हैं, वे लगातार माल सप्लाई का दबाव बना रहे हैं। कुछ के ऑर्डर कैंसिल हो गए तो कुछ ने खुद ही कैंसिल करा लिए। ऐसे में उन्होंने छोटी-मोटी मरम्मत का काम शुरू कर दिया है।

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