जयपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने गुर्जरों को विशेष पिछड़े वर्ग और सवर्ण गरीबों को आर्थिक पिछड़ों के तौर पर दिए आरक्षण पर रोक हटाने से इंकार करते हुए रोक को जारी रखा है।
मुख्य न्यायाधीश जगदीश भल्ला एवं न्यायाधीश मुनीश्वरनाथ भंडारी की खंडपीठ ने बुधवार को विश्वविद्यालय के एक छात्र जी. शर्मा की पत्र याचिका एवं अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के उस प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया जिसमें आरक्षण से रोक हटाने की गुहार की थी। प्रार्थना पत्र में कहा कि किन्हीं अपवाद की परिस्थतियों में पचास फीसदी से अधिक आरक्षण दिया जा सकता है इसलिए आरक्षण पर लगी रोक को हटाया जाए। लेकिन खंडपीठ इससे संतुष्ट नहीं हुई और प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।
याचिका के साथ ही खंडपीठ ने कैप्टेन गुरुविंदर सिंह एवं समता आंदोलन की याचिका पर संयुक्त सुनवाई करते हुए गुर्जर महासभा एवं गुर्जर समुदाय को इंटरवीनर नियुक्त किया। खंडपीठ ने इनके वकील आर.आर.बैंसला एवं वी.एस.गुर्जर को कहा कि वे मामले में सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रख सकते हैं। साथ ही खंडपीठ ने समता आंदोलन एवं अन्य को याचिका में संशोधन करने की भी अनुमति दे दी।
समता आंदोलन एवं अन्य ने याचिका में राज्य सरकार की ओर से 68 फीसदी आरक्षण के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि सरकार पचास फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं दे सकती और वह एम.नागराज मामले में दिए निर्णय की पालना नहीं कर रही है। इसलिए आरक्षण पर लगी रोक को जारी रखा जाए।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने एक छात्र जी.शर्मा के पत्र को याचिका मानते हुए सरकारी नौकरियों व शैक्षणिक संस्थानों में पचास प्रतिशत से अधिक आरक्षण देने पर रोक लगा दी थी। खंडपीठ ने मुख्य सचिव एवं महाधिवक्ता को निर्देश दिया था कि वे कोर्ट के आगामी आदेश तक नौकरियोंे व शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षित वर्ग को वर्टिकल (लम्बवत) रूप से पचास फीसदी से अधिक आरक्षण का लाभ नहीं दें।
याचिका में गुहार की गई थी कि राज्य सरकार ने गुर्जरों को विशेष पिछड़ा वर्ग श्रेणी में मानकर 5 फीसदी आरक्षण का लाभ दिया है, इसी श्रेणी में आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी के सवर्ण वर्ग के लोगों को 14 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया है। जबकि इससे पहले ही अनुसूचित जाति (एससी) को 16 फीसदी,अनुसूचित जनजाति (एसटी) को 12 एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 21 फीसदी आरक्षण का लाभ दिया हुआ है। सभी वर्ग के आरक्षण को जोड़ने के बाद यह 68 प्रतिशत हो जाता है। आरक्षण की इस व्यवस्था के कारण सामान्य वर्ग के विद्यार्थी अवसरों से वंचित रह जाते हैं। इस व्यवस्था पर न्यायोचित कार्रवाई करवाई जाए।