Jaipur
आईओसी टर्मिनल की लपटें शांत, धुआं बाकी
Bhaskar News Thursday, November 05, 2009 03:07 [IST]  

जयपुर. आईओसी टर्मिनल में लगी आग अब दो टैंकों तक सिमट चुकी है। लपटें मंद पड़ गई हैं, लेकिन धुआं का गुबार अभी गहराया हुआ है। सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में चहल पहल थोड़ी बढ़ गई है।



कुछ औद्योगिक इकाइयों व संस्थानों में मरम्मत कार्य भी शुरू करा दिया गया है। टर्मिनल के 500 मीटर के दायरे के बाहर क्षेत्र को डेंजर जोन से मुक्त किए जाने और उद्योगपतियों को प्रवेश के पास वितरित किए जाने के बाद यहां आवाजाही बढ़ गई।



इस बीच प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की केंद्र व राज्य की टीमों ने विभिन्न स्थानों पर पर्यावरणीय जांच संबंधी उपकरण लगाए। जिला प्रशासन ने भी जीएसएस मरम्मत का काम शुरू करा बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है।



उधर हादसे से प्रभावित कुछ गांवों व क्षेत्रों में मुआवजा राशि वितरण का काम शुरू करा दिया गया है। हालांकि कुछ लोगों ने समुचित मुआवजा नहीं दिए जाने का आरोप लगाते हुए एक दल को लौटा भी दिया। इस बीच प्रशासन की ओर से बनाए गए राहत शिविरों से भी लगभग सभी लोग अपने अपने घरों की ओर लौट गए हैं। साथ ही कॉलेजों में दो तीन दिनों में पढ़ाई शुरू होने की सूचना के बाद विद्यार्थियों ने होस्टलों में लौटना भी शुरू कर दिया है।



सामान्य होने लगे हालात



जयपुर. आईओसी टर्मिनल की आग अब बुझने की ओर है। बुधवार को हादसे के सातवें दिन भी दो टैंक सुलगते रहे, लेकिन दोनों में लपटें अन्य दिनों की अपेक्षा बहुत कम और धुआं ज्यादा था। इस बीच सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में उद्योगकर्मियों की आवाजाही कुछ बढ़ गई। बहुत सी औद्योगिक इकाइयों व संस्थानों में नुकसान की जांच, सर्वे, मरम्मत आदि काम शुरू होने लगा है।



बुधवार को टर्मिनल के टैंकों से निकल रहा धुआं इतना गहरा हो गया कि आसमान में कालिमा-सी छा गई थी। इससे पहले सूरज धुएं के बादलों में छिपा रहा और कई किलोमीटर के दायरे में छाया ही बनी रही। मंगलवार रात करीब 2 बजे एक टैंक से फिर से लपटें तेज हुईं। इनकी ऊंचाई टैंक के ऊपरी हिस्से से लगभग 4 से 5 मंजिला जितनी पहुंची। यह लपटें ज्यादा देर तक दिखाई नहीं दीं, पर धुआं बढ़ाती रहीं। बुधवार सुबह से शाम तक यही नजारा रहा। सुलगती आग और धुएं के बीच लोगों की आवाजाही पर रोक बरकरार रही। दोपहर बाद टोंक रोड पर एक स्थान से बेरियर हटाए तो लोग कुछ आगे बढ़े।



इधर सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र के ओवरब्रिज पर भी आने-जाने में पुलिस ने कुछ नरमी का रुख बरता। आसपास के गांवों के लोगों को पूछताछ के बाद पैदल आने-जाने दिया गया। वाहनों पर कुछ लोग जबर्दस्ती और कुछ पुलिसवालों को राजी करके भी निकल गए। वैसे ज्यादातर उन्हीं वाहनों को जाने दिया गया जिनके पास कलेक्ट्रेट की ओर से जारी किए गए पास थे।



बच्चें को वापस भेजा रिश्तेदारों के पास



तेल डिपो से धुआं निकलने से लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। चतरावाला के सीताराम ने बताया कि दवाइयां लेने पर भी सुधार नहीं हो रहा है। गोविंदविहार कॉलोनी की गंगादेवी ने बताया कि मंगलवार को बच्चों को रिश्तेदारों के घर से बुलवा लिया, लेकिन धुएं से परेशान होकर फिर वहीं भेज दिया।



मजदूरों की हालत सबसे खराब : औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों को छह दिन से रोजी-रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो गया है। गंगासागर महाजन ने बताया कि रोजाना की मजदूरी ही जीवन यापन का जरिया है, अब घर में खाने के लाले पड़ रहे हैं।



दहशत के साये में वापसी



आईओसी डिपो के 500 मीटर दायरे से बाहर रहने वाले कुछ लोग अपने घरों को लौटने लगे हैं, लेकिन उनके मन में दहशत बरकरार है। हालांकि बीमारियों के डर से बच्चे, बूढ़े और महिलाएं लौट नहीं रहे। बुधवार को भी आसपास के क्षेत्र में 30 से 50 फीसदी मकानों व दुकानों पर ताले लगे थे। सबसे खराब हालत रोजाना वाले मजदूरों और छोटे-मोटे व्यवसाइयों की है। प्रशासन ने डिपो से 500 मीटर दायरे में प्रवेश प्रतिबंधित कर रखा है। कई लोग तो अब यहां से अपना घरेलू सामान दूसरी जगह शिफ्ट करने में लगे हैं।



इधर सातवें दिन भी दो टैंकों में धुआं जारी रहने से प्रभावित क्षेत्र के दो किलोमीटर दायरे में रहने वालों का कहना है कि वे माहौल सामान्य होने पर ही लौटेंगे। चतरावाला के बाबूलाल शर्मा ने बताया कि धुएं से बीमार होने तथा दुबारा हादसा होने की आशंका लोगों के दिल से जा नहीं रही। सीतानगर के महादेव चौधरी ने बताया कि आग शांत नहीं होने से लोगों को यहां रहने में डर लग रहा है। चोरियां होने से एक परिवार में एक दो व्यक्ति ही रह रहे है, बाकि रिश्तेदारों के पास गए हैं। कई मकानों में ताले लगे हैं।



बाजार बंद: सीतापुरा, चतरावाला, वाटिका, रामचंद्रपुरा के ज्यादातर बाजार अभी भी दुकानें बंद होने से कई लोगों की आजीविका का जरिया गड़बड़ा गया है। श्रवणलाल बूपला ने बताया कि छह दिन से हजारों का नुकसान हो गया है।

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