Jaipur
निकाय चुनाव से वंचित ही रहेंगे सांसद व विधायक
Bhaskar News Thursday, November 05, 2009 03:10 [IST]  

जयपुर. सांसदों, विधायकों और पंचायत प्रमुखों को निकायों में चुनाव लड़ने की अनुमति देने को लेकर स्वायत्त शासन विभाग में एक बार फिर गफलत हो गई। विभाग ने बुधवार को पहले तो सांसद, विधायक और पंचायत प्रतिनिधियों को निकाय प्रमुख का चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी। लेकिन देर रात वापस ले लिया। इससे पहले निकाय प्रमुखों की लॉटरी निकालने के वक्त भी हाईकोर्ट का आदेश पढ़ने में चूक हो गई थी।



नतीजतन लॉटरी ही स्थगित करनी पड़ी थी। स्वायत्त शासन विभाग की ओर से बुधवार शाम सांसदों, विधायकों और पंचायती राज संस्थाओं के जन प्रतिनिधियों को चुनाव लड़ने की अनुमति देने संबंधी आदेश जारी किया था। इस आदेश के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी कलेक्टरों को इसकी न सिर्फ सूचना जारी कर दी बल्कि निर्वाचन अधिकारियों और सहायक निर्वाचन अधिकारियों को नामांकन स्वीकार करने के निर्देश देने के लिए भी कह दिया।



देर रात नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने बताया कि सांसद, विधायक और पंचायत प्रमुखों को निकायों में महापौर, सभापति और अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होगी। इसके लिए नियमों में पुन: संशोधन कर दिया गया है। नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि पूर्व की भांति उपमहापौर, उपसभापति और उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए होने वाली बैठक में न तो शामिल होंगे और न मत दे सकेंगे। धारीवाल ने बताया कि यदि सांसद, विधायक और पंचायत प्रमुख वोट डालने का अधिकार लेना चाहते हैं तो उनको पार्षद का चुनाव लड़ना होगा।



पहले क्या आदेश दिया: इससे पहले स्वायत्त शासन विभाग की ओर से राजस्थान नगर पालिका (निर्वाचन) (द्वितीय संशोधन) नियम, 2009 के नियम 78 के उपनियम (4) में संशोधन किया गया था। इसके अनुसार सांसद, विधायक, पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकाय संस्थाओं के सदस्य महापौर, सभापति और अध्यक्ष का चुनाव लड़ सकेंगे, लेकिन उन्हें जीतने के बाद 14 दिन के भीतर पहले वाले पद से इस्तीफा देने का प्रावधान किया था। साथ ही नाम निर्देशन पत्र (प्रारुप 3—क)में भाग 3 के क्रम संख्या 5 पर वर्णित घोषणा की प्रविष्टि को भी हटा दिया गया था। देर रात आयोग के अधिकारियों को नए संशोधन की जानकारी नहीं थी।

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