चंडीगढ़. पंजाब किसान आयोग के चेयरमैन डॉ. जीएस कालकट ने किसानों की आत्महत्याओं को रोकने के लिए सोशल रिफॉर्म्स का आह्वान किया है। पंजाब की खेतीबाड़ी को पेश आ रही समस्याओं से विधायकों को अवगत करवाने के लिए बुधवार को आयोजित वर्कशॉप में डॉ. कालकट ने अनेक सुझाव दिए।
उन्होंने किसान यूनियनों और किसानों से जुड़ी अन्य संस्थाओं द्वारा सहयोग न दिए जाने पर चिंता भी जताई। कहा कि आयोग ने किसानों की आत्महत्याओं की जो स्टडी करवाई है उसमें आया है कि पांच एकड़ से कम भूमि वाले किसानों ने ही आत्महत्या की है। आत्महत्या करने वालों में 71 फीसदी ऐसे किसान हैं जो कभी स्कूल ही नहीं गए थे।
आत्महत्या करने वाले ज्यादातर किसानों ने बैंकों और आढ़तियों से कर्ज लिया और उसका उपयोग गैर उत्पादन क्षेत्र में किया। विवाह शादियों पर वित्त से ज्यादा खर्च करना, कम जमीन के बावजूद ट्रैक्टर और अन्य महंगी मशीनरी खरीदना ऐसे कारण सामने आए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पांच एकड़ से कम जमीन वाले किसानों के लिए सर्विस सेंटर खोले जाएं जिनमें ट्रैक्टर व खेती से संबंधित अन्य साजो सामान रखा जाए जो इन्हें किराये पर दिया जाए।
उन्होंने छोटे किसानों को सामान पर कैपिटल इन्वेस्टमेंट न करने की सलाह दी। इसके अलावा उन्होंने छोटे किसानों को नेट हाउस बनाकर सब्जियां उगाने की सलाह दी। इससे दो कनाल में एक लाख रुपए तक की सालाना आमदनी हो सकती है। कालकट ने ग्रामीण बच्चों की उच्च शिक्षा में अनुपस्थिति पर भी चिंता जाहिर की। बताया कि आयोग इस पर स्टडी कर रहा है। इसके अलावा उन्होंने पंजाब के गिरते भूजल को बचाने के लिए वाटर रीचाजिंग और धान के अधीन रकबा कम करने की सिफारिश की।