Chandigarh
हुड्डा का पहला बड़ा इम्तिहान ‘ऐलनाबाद’
प्रमोद वशिष्ठ Thursday, November 05, 2009 03:16 [IST]  

चंडीगढ़. सिरसा जिले की ऐलनाबाद विस सीट खाली कर इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने सबका ध्यान यहां होने वाले उपचुनाव पर केंद्रित कर दिया है। हालांकि उपचुनाव छह माह के अंदर होना है लेकिन सिरसा चौटाला का गृह जिला होने के कारण सत्ताधारी कांग्रेस, खासकर मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के लिए चुनौतियां अभी से शुरू हो गई हैं। चुनाव भले ही कोई लड़े, यहां होने वाला मुकाबला हुड्डा बनाम चौटाला ही रहेगा।



यूं तो हमेशा से सत्ताधारी दल के सामने किसी पार्टी के लिए उपचुनाव जीतना बहुत बड़ी बात होती है लेकिन अगर उपचुनाव विरोधी दल के गढ़ में हो तो मुकाबला रोचक रहता है। इस बार उपचुनाव चौटाला के गृह जिले में ऐसी सीट पर होगा। इस उपचुनाव से चौटाला का राजनीतिक कद तय होगा। दूसरी ओर हुड्डा इस सीट को हर कीमत पर कांग्रेस की झोली में डालना चाहेंगे।



अगर वह ऐसा कर पाए तो एक तीर से दो निशाने साध लेंगे। एक तो विधानसभा चुनाव में 30 सीटें जीतने वाली इनेलो की हवा निकल जाएगी और दूसरा, चौटाला के गृह जिले में उन्हें हराने पर सोनिया दरबार में पैठ और मजबूत हो जाएगी। चौटाला ने अपना प्रत्याशी जल्द घोषित करने की बात कही है और जरूरी नहीं है कि टिकट उन्हें परिवार के ही किसी सदस्य को मिले।



यहां मतदाताओं का देवीलाल परिवार के प्रति समर्पण बहुत ज्यादा है और वह परिवार को पार्टी के मुकाबले ज्यादा महत्व देते हैं। ऐसे में कांग्रेस यहां से रणजीत सिंह चौटाला पर दांव खेल सकती है। अगर रणजीत को कांग्रेस ने टिकट दिया तो एक ही परिवार के दो सदस्यों के आमने-सामने होने से उपचुनाव बहुत रोचक हो जाएगा।



उचाना में नए समीकरण



उचाना कलां से विधानसभा सदस्यता बरकरार रखते हुए चौटाला ने जाटलैंड में एक बार फिर अपनी जड़ें जमाने का संकेत देते हुए नए समीकरणों को जन्म दिया है। उन्होंने यहां से कांग्रेस के दिग्गज नेता बीरेंद्र सिंह को हराया है।



भजन से हारी थी कांग्रेस



पिछली बार कांग्रेस सरकार के रहते भजनलाल अपनी पार्टी हजकां के टिकट पर आदमपुर से उपचुनाव जीतने में कामयाब रहे थे।



ऐलनाबाद विधानसभा सीट : एक नजर



हाल में हुए विधानसभा चुनाव में ऐलनाबाद से इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला ने कांग्रेस के भरत सिंह बैनीवाल को 16 हजार से ज्यादा मतों से हराया था। चौटाला ने 39 साल पहले अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत ऐलनाबाद से ही की थी। वह 1970 में पहली बार भी ऐलनाबाद से ही विधायक चुने गए थे। 1972 के बाद ऐलनाबाद सीट रिजर्व हो गई और इस बार ही दोबारा ओपन हुई। ऐलनाबाद को शुरू से ही चौटाला का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। पिछले आठ चुनाव में से सात दफा यहां से इनेलो प्रत्याशी जीते हैं।

  Bookmark and Share
 


अपने विचार यहां लिखें:
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: