चंडीगढ़. पंजाब में छोटे किसानों पर हर साल कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है और भू—जल का स्तर हर साल 75 सेंटीमीटर तक गिर रहा है। आलम यह है कि हर तीसरे दिन राज्य में कोई न कोई किसान आत्महत्या कर रहा है।
किसानों की समस्याओं को सुलझाने को लेकर पंजाब के विधायकों की गंभीरता का अंदाजा उस समय लगा जब किसानों से जुड़ी एक वर्कशॉप में बुधवार को आमंत्रित 116 विधायकों में से दर्जन भर भी इसमें नहीं आए। स्पीकर निर्मल सिंह काहलों और संसदीय कार्यमंत्री तीक्षण सूद को मिलाकर भी आंकड़ा 11 तक ही पहुंच सका। और तो और कृषि मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह ने भी इस वर्कशॉप की अनदेखी ही की।
सुबह साढ़े दस बजे वाले सत्र की तो अध्यक्षता ही उनको करनी थी। विधायकों को कृषि संबंधी जानकारियों से अवगत कराने के लिए बुलाए गए बड़े अधिकारी और खेती के विशेषज्ञों के अलावा मुख्य सचिव एससी अग्रवाल, एफसीडी एन एस कंग भी इस वर्कशॉप में मौजूद थे। दो घंटे तक इंतजार के बाद भी ज्यादातर विधायकों की गैरमौजूदगी के चलते आधे घंटे में ही वर्कशॉप निपट गई।
वर्कशॉप का आयोजन संसदीय कार्य विभाग की ओर से महात्मा गांधी इंस्टीटच्यूशन ऑफ पब्लिक एडमिस्ट्रेशन के सहयोग से कराया गया था। स्पीकर काहलों और मंत्री तीक्ष्ण सूद ने मंगलवार के पंजाब बंद को ज्यादातर विधायकों के वर्कशॉप में शामिल न हो पाने की वजह बताया। फरीदकोट के विधायक अवतार सिंह बराड़, नकोदर के अमरजीत सिंह समरा, रायकोट से हरमोहिंदर सिंह प्रधान, शेरपुर से हरचंद कौर, गढ़शंकर से लव कुमार गोल्डी,मोरिंडा के उजागर सिंह वडाली और अमृतसर नॉर्थ के अनिल जोशी ही वर्कशाप में शामिल हुए। हालांकि वह इस बात को टाल गए कि बनूड़ जैसे हलकों के विधायकों को यहां पहुंचने में क्यों दिक्कत हुई जो कि रहते ही चंडीगढ़ में हैं।