लीमा. पेरू के वैज्ञानिकों ने देश के ग्लेशियरों को बचाने के लिए नई तकनीक सुझाई है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यदि बर्फ से जमने वाली चट्टानों और उसके पिघलने से खाली हुई जगह पर सफेद पेंट पोत दिया जाए, तो इस समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।
ऐसे में यह सतह कम मात्रा में ऊष्मा सोखेगी। इससे बर्फ को सतह पर रोकने में मदद मिलेगी। पेरू के गैर सरकारी संगठन के अध्यक्ष एडुआडरे गोल्ड ने इस संबंध में एक प्रस्ताव देश की संसद की पर्यावरण समिति के समक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि उनका यह विचार विश्व बैंक को काफी पसंद आया है। अब वह इस संबंध में विभिन्न देशों में एक श्रंखला चलाने पर विचार कर रही है। गोल्ड का कहना है कि ग्लेशियर के पिघलते ही भूरी सतह दिखने लगती है।
यह ज्यादा मात्रा में ऊष्मा अवशोषित करती है। इस कारण अन्य ग्लेशियर की बर्फ पिघलने की दर बढ़ जाती है। हमारा सुझाव है कि इस सतह पर सफेद पेंट पोतकर हम इस दर को नियंत्रित कर सकते हैं। हमने इस अवधारणा को पॉजिटिव फीडबैक नाम दिया है। गोल्ड का कहना है कि इस प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जाने वाला सफेद पेंट केमिकल रहित होना चाहिए। इनमें प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करेंगे।
इतना ही नहीं इस कार्यक्रम से हम अगले पांच वष्रो में 15 हजार नए रोजगार के अवसर पैदा कर सकेंगे। गौरतलब है कि सफेद रंग पोतने का यह विचार नया नहीं है। इससे पहले भौतिकी के लिए नोबेल जीत चुके अमेरिकी वैज्ञानिक स्टीवन चाउ भी इस तरह के विचार प्रस्तुत कर चुके हैं। यही नहीं दुनिया के कुछ शहरों जैसे न्यूयॉर्क में गर्मी से बचने के लिए यह शुरू भी किया जा चुका है। यहां पर कई लोग घरों की छत को सफेद रंग से पोतने लगे हैं। गोल्ड ने इस योजना को आगे बढ़ाते हुए इसे ग्लेशियर पर लागू करने की बात कही है।