जोधपुर. सूर्यनगरी में जगह—जगह दरकी हुई सड़कों से लोग परेशान हैं। खासकर वॉल सिटी में तो हालात खस्ता हो रखे हैं। कहीं टूटी सड़कों पर सीवरेज का पानी आने से लोगों को राह से गुजरना मुश्किल हो जाता है तो कहीं सड़कों पर बने गड्ढे हादसों का सबब बन रहे हैं। इस तरफ संबंधित विभाग की ओर से ध्यान नहीं दिए जाने से लोगों की परेशानी में लगातार इजाफा हो रहा है।
यही वजह है कि भास्कर की ओर से किए सर्वे में लोगों ने शहर की सड़कें सुधारने और उनकी समय समय पर मरम्मत पर सर्वाधिक जोर दिया है। शहर की मुख्य सड़कों के साथ ही इनसे जुड़ी संपर्क सड़कों की हालत भी खराब है। सरकारी विभागों में आपसी तालमेल न होने के कारण एक साल पहले बनी सड़कों को पिछले माह दीपावली पर विद्युत लोड बढ़ाने और टेलीफोन की लाइनें डालते वक्त तोड़ दिया गया।
इस क्षेत्र में बढ़ते भूजल को थामने के लिए पाइप बिछाने के दौरान घंटाघर, पन्ना निवास, उम्मेद चौक, हाथीराम का ओडा सहित अन्य इलाकों में सड़कें दुबारा तोड़ दी गईं। बाद में उनकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया गया। इसका खामियाजा यहां से गुजरने वाले हजारों लोग भुगत रहे हैं। माणक चौक, किल्ली खाना तथा चित्रा मार्केट के आसपास पेइंग गेस्ट हाउसेज की भरमार होने से यहां विदेशी सैलानियों का आना जाना ज्यादा रहता है। इन सैलानियों को पैदल चलते या गाड़ियों में निकलते भी हिचकोले खाने पड़ते हैं।
यहां तो बनी ही नहीं सड़कें
बीजेएस से जुड़ी कुछ कॉलोनियों के साथ बाहरी इलाके की रामेश्वर नगर, केके कॉलोनी, पाल रोड के आसपास की कॉलोनियों में सड़कें नहीं होने से पगडंडियों जैसे रास्तों से निकलना पड़ता है। यहां दिनभर उड़ने वाली मिट्टी से स्थानीय बाशिंदे परेशान रहते हैं। यहां के बाशिंदे अपने क्षेत्र की सड़कों के लिए कई बार विभिन्न विभागों में पत्राचार करते रहे है। यही नहीं पत्राचारों के बाद सीधे अधिकारियों से सड़कों की समस्या को लेकर मिलते भी रहे है। लेकिन इन इलाकों के लिए न तो बजट बना और नही सड़क।