भोपाल. शहर की गंदगी के ट्रीटमेंट और उससे जुड़े अन्य कामों के लिए करीब 10 साल से कई एजेंसियों ने करोड़ों की लागत से कार्य किए, लेकिन शहर का तीन चौथाई क्षेत्रों में गंदगी से निपटने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। दूसरी तरफ सवा तीन सौ करोड़ की एक और योजना राज्य शासन के पास लंबित है।
शहर में सीवरेज के ट्रीटमेंट के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से गंदगी झीलों में मिल रही है और सड़कों पर बह रही है। करीब एक साल पहले जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) में सवा दो लाख मकानों के सीवरेज के ट्रीटमेंट के लिए 315 करोड़ रुपए की योजना तैयार हुई थी। यह योजना आज भी राज्य शासन के पास लंबित है।
भोपाल शहर की गंदगी के ट्रीटमेंट और उससे जुड़े अन्य कामों के लिए करीब एक दशक से विभिन्न एजेंसियां यहां काम करने आईं। भोजवेट लैंड परियोजना, एशियन विकास बैंक (एडीबी) ने टुकड़ों में काम किए और एडीबी अभी-भी काम कर रही है। भोजवेट लैंड परियोजना में केवल बड़ी झील में मिलने वाले नालों की गंदगी की पंपिंग की व्यवस्था की गई।
इसके लिए सात पंपिंग स्टेशन बनाए गए। फिर आई एशियन विकास बैंक (एडीबी) जिसमें भोजवेट लैंड परियोजना के पंपिंग स्टेशन को ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ने और एक ट्रीटमेंट प्लांट में शहर के कुछ हिस्सों के सीवरेज को ले जाने की परियोजना पर काम शुरू हुआ। आज भी शहर के तीन चौथाई क्षेत्र की गंदगी के ट्रीटमेंट का इंतजाम नहीं है।
एडीबी में यह हुआ
सीवेरज ट्रीटमेंट के लिए एडीबी प्रोजेक्ट में दो प्लांट बने। इनमें से एक दामखेड़ा-माहौली ट्रीटमेंट प्लांट में भोजवेट लैंड परियोजना के पंपिंग स्टेशनों को जोड़ा गया, जिसमें नेहरू नगर, कोटरा, कोहेफिजा, बाणगंगा जैसे क्षेत्रों का सीवरेज जाता है। कोलुआ के दूसरे ट्रीटमेंट प्लांट में अभी काम चल रहा है। यह जून 2010 तक पूरा हो जाएगा।
जेएनएनयूआरएम का प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ा
जेएनएनयूआरएम के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट और लोगों के घरों को उससे जोड़ने के लिए 315 करोड़ रुपए का एक प्रस्ताव तैयार किया गया था। वर्ष 2040 में भोपाल की आबादी को ध्यान में रखकर बनाए गए सीवरेज ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट में करीब साढ़े छह किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाकर उसका ट्रीटमेंट किए जाने की योजना थी। इसमें प्रतिदिन ढाई सौ मिलियन लीटर क्षमता के ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने का प्रावधान था। सालभर पहले बने प्रस्ताव को अभी तक केंद्र सरकार को नहीं भेजा गया है। इसमें इब्राहिमपुरा, मैकेनिक नगर जैसे क्षेत्र के करीब एक लाख लोगों का सीवरेज जाएगा।
अभी निर्णय नहीं
जेएनएनयूआरएम के सीवरेज सिस्टम प्रस्ताव पर अभी निर्णय नहीं हुआ। राज्य शासन के पास यह प्रस्ताव लंबित है। इस मिशन में अतिरिक्तराशि आवंटित होने पर ही इसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
मनीष सिंह, आयुक्त, नगर निगम