भोपाल. महंगाई इतनी बेलगाम हो चुकी है कि अब सरकार ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में लोगों को बुनियादी जरुरतें ही पूरी करने में बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
जनसंख्या में भारी इजाफा, कृषि क्षेत्र में आवासीय बसाहट और बदलते मौसम से खाद्यान्न की घटती उपज ने डिमांड और सप्लाई के बीच की खाई को इतना चौड़ा कर दिया है कि महंगाई बेलगाम हो गई। उस पर बाजार में बैठे सट्टेबाज कीमतों को नित नए आसमान दिखा रहे हैं।
पिछले साल के मुकाबले इस साल खाद्यान्न सहित रोजमर्रा की सभी वस्तुओं में 20 से 50 प्रतिशत तक की तेजी आ चुकी है और आगे इनमें किसी भी प्रकार से मंदी की गुंजाइश नहीं है। हालांकि बाजार के जानकारों का मानना है कि सरकारी और निजी क्षेत्र की नौकरियों में लोगों के वेतन में बढ़ोत्तरी हुई है, जिससे उपभोक्ता की क्रय शक्ति में बढ़ोत्तरी हुई है।
एक अनुमान के मुताबिक पिछले साल की तुलना में सरकारी कर्मचारी का वेतन 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई, जबकि निजी क्षेत्र में वेतन की बढ़ोत्तरी नहीं हई। डिमांड और सप्लाई के बढ़े अंतर से आम आदमी की सुबह से रात तक के जीवन पर महंगाई ने अपना असर छोड़ा है। रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाली वस्तुएं पावडर, हेयर ऑइल, क्रीम, बिस्किट, ब्रेड, पोहा, खाद्यान्न, गैस सिलेंडर हो या सुबह का नाश्ता, ऑफिस जाने-आने, शाम को परिवार के साथ घूमने या किसी होटल में खाना खाना, सब पर महंगाई काबिज हो चुकी है।