सोनीपत. गन्ने को अब ग्रहण लग गया है। गन्ने के अभाव में शुगर मिल दम तोड़ रहा है। इस बार भी मुश्किल से पचास दिन ही मिल चल सकेगा। किसानों द्वारा गन्ना कम उगाने के चलते गन्ना नहीं मिल पाता है। यही कारण है कि चीनी के दाम बढ़ते ही जा रहे हैं। किसानों का रुझान जहां गन्ने की तरफ कम हो रहा है तो चीनी के दाम भी बढ़ते ही जा रहे हैं।
सरकार ने इस बार गन्ने का भाव 185 रुपए कर दिया है। फिर भी किसान गन्ना नहीं उगा रहे हैं। किसान धान उगा रहे हैं, लेकिन उन्हें धान का इस बार उचित भाव नहीं मिल रहा है। किसान जिस तरफ रुझान दिखाते हैं, उन्हें उसी तरफ निराशा ही मिलती है। शुगर मिल के गन्ना प्रबंधक एमएल शर्मा का कहना है कि अभी तक तय नहीं कि शुगर मिल कब से शुरू होंगे।
उम्मीद है कि नवंबर महीने के अंतिम सप्ताह तक शुगर मिल के शुरू होने की उम्मीद है। गन्ना पिछली बार के बराबर या उससे कम रह सकता है। जिसके चलते इस बार भी मुश्किल से पचास दिन ही मिल चलने की उम्मीद है।
हर साल करोड़ों की मरम्मत : मिल की मरम्मत पर हर साल करोड़ रुपए से अधिक खर्च होते हैं। उसके बाद मिल रनिंग में आता है। एक तो मिल की मशीनरी अधिक पुरानी हो चुकी है ऊपर से पिराई के बाद कुछ न कुछ खराबी आ ही जाती है।
दूसरे मिलों की और भी अधिक खस्ता हालत : सोनीपत शुगर मिल तो पचास दिन चलेगा ही, जबकि दूसरे शुगर मिलों की हालत और भी अधिक खराब है। जींद शुगर मिल मुश्किल पन्द्रह दिन, गोहाना शुगर मिल बीस दिन और महम शुगर मिल मुश्किल से बीस दिन ही चल सकेगा। क्योंकि वहां पर गन्ना और भी कम है।