भोपाल. राज्य महिला आयोग में बुधवार को संयुक्त बैंच का आयोजन किया गया। इसमें पारिवारिक विवाद, भरण पोषण, कार्यस्थल प्रताड़ना जैसे 20 प्रकरणों को रखा गया। इस तीन सदस्यीय बैंच में उपमा राय, सुषमा जैन और अमिता चपरा ने सुनवाई की। कार्यस्थल प्रताड़ना के एक मामले में आयोग ने कहा कि काम पर देरी से आने की स्थिति में वरिष्ठ अधिकारी द्वारा अधीनस्थ महिला कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कार्यस्थल प्रताड़ना नहीं है। आयोग ने कहा कि कामकाजी महिलाओं को आवेदन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
मास्टर लाल सिंह चिकित्सालय में नर्स के पद पर पदस्थ संघरत्ना पवार के आवेदन पर आयोग ने यह फैसला सुनाया। उन्होंने वरिष्ठ डॉक्टर भास्कर देव शर्मा पर कार्यस्थल प्रताड़ना का आरोप लगाया था। डॉ. भास्कर द्वारा आयोग में प्रस्तुत किए गए डाक्यूमेंट के आधार पर आयोग ने पाया कि आवेदिका अक्सर अस्पताल देर से आती थी और अनुपस्थिति लग जाने के बाद उसे काटकर हस्ताक्षर करती थी। यही नहीं, ड्यूटी के दौरान वे मरीजों के प्रति लापरवाही भी बरतती थीं। ऐसे में वरिष्ठ चिकित्सक द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने पर आवेदिका ने द्वेषपूर्ण भावना से आयोग में शिकायत की।
सचिव को हटाने के निर्देश
विवेकानंद कॉलेज के सचिव पर एक महिला कर्मचारी ने कार्यस्थल प्रताड़ना का आरोप लगाया। उसने आयोग को बताया कि सचिव कई बार कॉलेज में उसका हाथ पकड़कर अश्लील बातें करते हैं। उनके डर से वह नौकरी नहीं कर पा रही हैं। आयोग ने विवेकानंद कॉलेज की प्राचार्या को इस मामले में सचिव को हटाने तथा उस क्षेत्र के थाना प्रभारी को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दिए।
दूसरी शादी नहीं हो सकती
काजीकैंप निवासी तब्बसुम खान ने शिकायत की कि उसकी शादी के सात माह ही हुए हैं। पति बादशाह खान ने मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया है और दूसरी शादी करने जा रहा है। वे गर्भवती हैं, ऐसे में वह अपनी तथा होने वाले बच्चे की देखभाल कैसे करेंगी। इस पर आयोग ने कहा कि उसकी रजामंदी या तलाक लिए बिना पति दूसरी शादी नहीं कर सकता। आयोग ने इस मामले में हनुमानगंज थाना प्रभारी को मामले की जांच कर प्रतिवेदन देने के निर्देश दिए ।
नौ प्रकरण नस्तीबद्ध
सुनवाई के लिए 13 आवेदक-अनावेदक उपस्थित थे। सुनवाई के बाद नौ प्रकरणों को नस्तीबद्ध किया गया। इस दौरान दहेज प्रकरण के दो, पारिवारिक विवाद के सात, कार्यस्थल प्रताड़ना के दो, भरण-पोषण का एक और आठ अन्य प्रकरण रखे गए।
छात्रों ने देखी कार्यवाही: यह कार्यवाही देखने के लिए बेंगलुरु के सिम्बायसे से महाविद्यालय के छात्र आए थे।
कॉलेज द्वारा इनमें से दो छात्रों नीतेश भीमरे और मोहित पांडे को विभिन्न राज्यों के महिला आयोग की कार्यप्रणाली के तरीके पर प्रोजेक्ट करने को दिया गया है।