बिलासपुर. राज्य शासन की उदासीनता और समय पर डीपीसी न होने के कारण यूनिवर्सिटी में अधिकारियों की पदोन्नति के अवसर दम तोड़ रहे हैं। प्रदेश की सभी यूनिवर्सिटी में व्याख्याता और सहायक प्राध्यापकों को प्रतिनियुक्ति देकर रजिस्ट्रार बना दिया गया है। इसका कारण विभाग अधिकारियों की कमी होना बताया जा रहा है। इन विसंगतियों को लेकर गुरुवार को राज्य भर के अधिकारी उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एमके राउत से मिलेंगे।
रजिस्ट्रार जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कई यूनिवर्सिटी में प्रतिनियुक्ति पर लेक्चरर और असिस्टेंट प्रोफेसर को नियुक्ति दे दी गई। उच्च शिक्षा विभाग इसे अधिकारियों को कमी भले ही बताता हो, लेकिन सच यह है कि तय समय पर पदोन्नति नहीं देने से शासन के पास उच्च पदों के लिए पर्याप्त संख्या में अधिकारी ही नहीं हैं।
दूसरी ओर पदोन्नति की उम्मीद लगाए बैठे अधिकारियों को भी इससे खासा नुकसान हुआ है। पूरे प्रदेशभर से अधिकारी गुरुवार को इस मामले को लेकर उच्च शिक्षा सचिव से मुलाकात करेंगे। राज्य गठन के बाद पीएससी से रजिस्ट्रार जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए एक बार भी सीधी भर्ती नहीं की गई है।
पूर्व में राज्य सेवा अधिनियम 1983 के तहत रजिस्ट्रार की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती थी। इसके बाद राज्य शासन के पास यह अधिकार चले जाने के बाद विसंगतियां उभरकर सामने आने लगीं। समय पर डीपीसी नहीं होने से सेक्शन आफिसर से असिस्टेंट रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार जैसे पदों के लिए पदोन्नति के अवसर जाते रहे। ये अवसर अधिकारियों को तब मिले, जब वे न्यायालय की शरण में गए।