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रात 10 के बाद डू नॉट डिस्टर्ब
शैलेन्द्र सिंह Thursday, November 05, 2009 07:07 [IST]  

नई दिल्ली. कैम्पस से लेकर राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर देर रात तक जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में जमने वाली छात्र मंडलियां बीते दिनों की बात बन जाएं तो हैरान न हों।



चिर परिचित परिपाटी के तौर पर सालों से चलन में देर रात की हंगामेदार चर्चाओं पर नियंत्रण के लिए अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया है। रेक्टर प्रो. रामाधिकारी कुमार की ओर से जारी आदेश में साफ कर दिया गया है कि जेएनयू रिहायशी कैम्पस है और यहां रात मंे हंगामा ठीक नहीं है, छात्रों को सभी का ख्याल रखना होगा।



प्रो. कुमार ने बताया कि जेएनयू परिसर में आएं दिन चर्चाओं के नाम पर मचने वाले हंगामे और मारपीट से न सिर्फ सुरक्षा विभाग परेशान है बल्कि कैम्पस में रहने वाले छात्र व शिक्षक भी इससे उकता गए हैं। उन्होंने बताया कि रात-रातभर होने वाली बैठकांे व ढाबों पर जमने वाली मंडलियों में शराब पीकर हंगामा करने की घटनाएं आम होती जा रही हैं। इन पर नियंत्रण के लिए अब इन सभी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जाएगा।



छात्रों को पिछले दिनों इंटर हॉस्टल एडमिनिस्ट्रेशन (आईएचए) की बैठक में इस बात की जानकारी दे दी गई है कि वह रात 10 बजे से पहले ही अपनी तमाम तरह की चर्चाएं, बैठक और वाद-विवाद निबटा लिया जाए ताकि कैम्पस के अन्य निवासी आराम से सो सकेंऔर छात्र अध्ययन कार्य को अंजाम दे सकें। प्रो. कुमार ने बताया कि सुरक्षा अधिकारियों को इस बाबत आदेश दे दिया गया है कि वह रात 10 बजे के बाद कैम्पस में शोर-शराबे पर नियंत्रण के प्रति मुस्तैद रहें।



बैठकों व चर्चाओं में माइक का इस्तेमाल, नारेबाजी, हंगामे की स्थिति को देखते हुए तुरंत ही छात्रों को ऐसा करने से रोका जाए। इतना ही नहीं यदि कोई छात्र या छात्र समूह उनकी बात को गंभीरता से नहीं लेता है तो उनके खिलाफ विस्तृत रिपोर्ट कार्रवाई के लिए दी जाए। प्रो. ने कहा कि बाहरी लोगों पर भी प्रशासन कड़ी नजर रखे हुए है।



जुर्माना भी लग सकता है : जेएनयू प्रशासन की ओर से नियमों का पालन न करने वाले छात्रों पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। जेएनयू की सुरक्षा में जुटे एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें हंगामे पर नियंत्रण करने के लिए कहा गया है। नियमों के विरुद्ध व्यवहार करने वाले बाहरी छात्रों को जहां पुलिस केहवाले किया जा रहा है, वहीं जेएनयू के ऐसे छात्रों की शिकायत चीफ प्रॉक्टर को दी जाती है। सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि हाल ही में तीन जेएनयू छात्रों पर कैम्पस में सरेआम शराब पीने के चलते तीन-तीन हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है।



इस साल के चर्चित हंगामे



16 जनवरी : दिनदहाड़े एक कर्मचारी के बेटे करण बाली को कुछ बदमाशों ने अगवा किया और पीटकर रिहा कर दिया।

25 जनवरी : रात ढाई बजे दिल्ली पुलिस के सिपाही ने शराब के नशे में जेएनयू छात्रों से की मारपीट।

3 मार्च : उर्दू एमफिल प्रथम वर्ष का छात्र महबूब हसन शाम चार बजे लाइब्रेरी की आठवीं मंजिल से कूदने पहुंच गया। काफी समझाने बुझाने के बाद उसे नीचे उतारा गया।

14 सितंबर : एक बाहरी छात्र अपने कुछ छात्रों के साथ कैम्पस में बर्थडे मनाने पहुंचा और जेएनयू छात्रा के साथ-साथ छेड़छाड़ की।

8 अक्टूबर : दोपहर में कावेरी हॉस्टल में बम की सूचना मिली। जांच में पता चला की सूचना कोरी अफवाह थी।

28 अक्टूबर : देर रात कुछ बाहरी लोग कैंपस में पहुंचकर महात्मा गांधी को अपशब्द कहने लगे। इसके बाद छात्र उनसे भिड़ गए।

29 अक्टूबर : देर रात ताप्ती हॉस्टल में आयोजित एक चर्चा के दौरान जेएनयू छात्रों के दो खेमे आपस में भिड़े, सुरक्षा अधिकारियों ने अपनी मौजूदगी में खत्म कराया कार्यक्रम।

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