नई दिल्ली. दिल्ली को बिजली क्षेत्र में आत्मनिर्भर करने के लिए शीघ्र ही एक और बिजली संयंत्र स्थापित किया जाएगा। लगभग सौ मेगावाट क्षमता वाले इस संयंत्र को राजधानी के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। इस बाबत दिल्ली विकास प्राधिकरण ने एनडीपीएल बिजली कंपनी को जमीन मुहैया करानेका आश्वासन भी दिया है।
ज्ञात हो कि राजधानी का सबसे पुराना बिजली संयंत्र इंद्रप्रस्थ के बंद होने से राजधानी में सप्लाई होने वाली बिजली में लगभग 200 मेगावाट की कमी हो गई है। इस कमी को पूरा करने के लिए एक और बिजली संयंत्र स्थापित करने की तैयारी भी शुरू हो गई है। नए संयंत्र की क्षमता लगभग 100 मेगावाट होगी और इस संयंत्र के लिए कृष्णा बेसिन और कतार कंपनी से एनडीपीएल बिजली खरीदेगी। कंपनी के मुख्य प्रवक्ता अजय महाराज के मुताबिक जल्द से जल्द जमीन मुहैया कराने के लिए डीडीए ने आश्वासन दिया है। उन्होंने बताया कि राजधानी में बिजली की कमी को देखते हुए कंपनी प्रत्येक दो साल में इस तरह के छोटे-छोटे बिजली संयंत्र स्थापित करने की तैयारी कर रही है।
ज्ञात हो कि पहले ही रिठाला में एनडीपीएल लगभग 108 मेगावाट क्षमता वाला एक बिजली संयंत्र स्थापित कर रही है। अगले साल अप्रैल-मई तक संयंत्र से बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा। इन दिनों बिजली मामले में आत्मनिर्भर होने के लिए कई संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। बवाना और झज्जर के अलावा बामनौली में भी बिजली संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इनके अलावा कई कंपनियों से बिजली के लिए समझौते भी किए गए हैं। ज्ञात हो कि फिलहाल राजधानी में लगभग चार हजार मेगावाट के करीब बिजली की मांग है, लेकिन बिजली क्षेत्र में आत्म निर्भर न होने की वजह से दिल्लीवासियों को बिजली के लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भर होना पड़ता है।
निर्मित हो रहे नए बिजली संयंत्र
संयंत्र - क्षमता
बवाना - 1500 मेगावाट
झच्जर - 750 मेगावाट
बामनौली (प्रस्तावित)- 650 मेगावाट
एनडीपीएल-रिठाला - 108 मेगावाट
बीएसईएस यमुना खरीदेगी कूड़े से बनी बिजली
नई दिल्ली . कूड़े से बिजली तैयार होने से पहले ही बिजली खरीदने के लिए कंपनियां आगे आ रही हैं। गाजीपुर बिजली संयंत्र में कूड़े से बनने वाली बिजली का आधा हिस्सा बीएसईएस यमुना खरीदेगी। इस बाबत कंपनी ने ईस्ट दिल्ली वेस्ट प्रॉसेसिंग कंपनी लिमिटेड से एक समझौता किया है। समझौते के मुताबिक कुल हिस्से का 49 फीसदी बिजली बीएसईएस यमुना को मिलेगा।
ज्ञात हो कि गाजीपुर बिजली संयंत्र से उत्पन्न होने वाली बिजली से ढाई किलोवॉट लोड वाले 4000 मध्यवर्गीय घरों को यहां से पर्याप्त बिजली मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि गाजीपुर संयंत्र में उपयोग होने वाले कचरे से पर्यावरण को उतना फायदा होगा, जितना सवा लाख पेड़ लगाने या एक साल के लिए दिल्ली की सड़कों से 83 हजार कारें हटा लेने से होगा।