नई दिल्ली. राजधानी में एडिस मच्छरों का उत्पात जैसे-जैसे बढ़ रहा है, विभिन्न स्वास्थ्य एजेंसियों के बीच आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला भी संजिदा शक्ल लेता जा रहा है। एक तरफ स्वास्थ्य सुविधाओं मसलन ब्लड प्लेटलेट्स, बेड आदि की कमी से मरीज बेहाल हैं, दूसरी तरफ एजेंसियां मरीजों की संख्या को लेकर आपस में लड़ रही हैं।
लड़ाई का आलम है कि बीच-बचाव के लिए दिल्ली नगर निगम के मेयर को ही आगे आना पड़ा है। सूत्रों के मुताबिक निजी अस्पतालों एवं निगम के अधिकारियों के बीच शांति समझौता कराने के लिए गुरुवार को मेयर कंवर सेन की अध्यक्षता में एक आपात बैठक बुलाई गई है।
किसकी है जिम्मेदारी: दरअसल डेंगू पर नियंत्रण की जिम्मेदारी निगम की है। बचाव के उपायों के लिए योजनाएं बनाने से लेकर उनके क्रियान्वयन तक की जिम्मेदारी निगम के पास ही है। इसलिए तमाम सरकारी एवं गैर सरकारी स्वास्थ्य एजेंसियों के अलावा सभी निजी अस्पातलों को निगम द्वारा बनाए गए नियमों को पालन करना होता है।
निगम का आरोप: निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एनआर दास का कहना है कि निजी अस्पताल समय पर डेंगू मामलों की रिपरेटिंग नहीं कर रहे हैं, जबकि मरीज के अस्पताल पहुंचने के २४ घंटे के अंदर निगम का सूचित करना जरूरी होता है। निजी अस्पतालों की लापरवाही की वजह से दिल्ली में डेंगू तेजी से फैल रहा है।
निजी अस्पतालों की बेबाक टिप्पणी: दूसरी ओर, जयपुर गोल्डन अस्पताल के प्रमुख डॉ. जीके बालुजा ने निगम के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि हमारे यहां से मामलों की रिपरेटिंग सही समय पर की जा रही है। उनका कहना है कि पिछले तीन महीनों में डेंगू बुखार के ९क् मामलों की पुष्टि अस्पताल में हुई है। आईबीएम तकनीक द्वारा की गई जांच से मरीजों की पुष्टि हुई है। मामलों की सूचना निगम को नियमित अंतराल पर दी जा रही है।
महाराजा अग्रसेन अस्पताल की अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ममता का कहना है कि जब सफाई सहित बचाव के अन्य उपायों को लागू करना निगम की जिम्मेदारी है तो मामलों को छुपाने से हमें क्या फायदा होगा। हमारे यहां से डेली बेसिस पर रिपोर्टिग की जा रही है। जरूरत पड़ने पर सारे कागजता दिखा सकते हैं। मैक्स अस्पताल के एक अधिकारी का कहना है कि निगम अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए बेवजह आरोप लगा रहा है।