ग्रांट पर अब चलेगी कैंची
शिमला. राज्य सरकार से सहायता प्राप्त गैर सरकारी कॉलेजों की ग्रांट पर शिक्षा विभाग कैंची चलाएगा। राज्य सरकार ने नई अधिसूचना जारी कर यह फरमान जारी कर दिया है कि सहायता प्राप्त कॉलेजों की ग्रांट में शिक्षकों और कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के साथ साथ कटौती करती जाएगी।
26 अक्टूबर को शिक्षा सचिव पीसी धीमान की ओर से जारी की गई अधिसूचना के अनुसार सरकारी सहायता ले रहे निजी कॉलेजों की ग्रांट बढ़ाने के प्रावधान को भी खत्म कर दिया गया है। प्रदेश सरकार ने इस अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि अगर वेतनमानों की वजह से या फिर अन्य कारणों से शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन बढ़ता है तो इसका सारा भुगतान निजी कालेज ही करेंगे।
प्रदेश सरकार इसके लिए निकट भविष्य में ग्रांट बढ़ाने पर कोई विचार नहीं करेगी। नए नियमों में यह प्रावधान भी किया गया है कि अगर संस्थान में किसी शिक्षक या कर्मचारी की सेवानिवृत्ति से कोई पद खाली हो जाता है तो फिर इस पद पर कार्यरत कर्मचारी के वेतन भुगतान के लिए मिलने वाली ग्रांट भी समाप्त हो जाएगी।
संस्थान ऐसे में रिक्त हुए पद पर नई नियुक्ति करते हैं तो उसके वेतन भुगतान के लिए ग्रांट में कोई प्रावधान नहीं किया जाएगा। सरकार ने इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि निजी कॉलेजों को मिलने वाली ग्रांट की राशि भी वही रहेगी जो 31 मार्च 2008 तक जारी की जा रही थी। इसके बाद कोई नया वेतनमान मिलता है और वेतन बढ़ोतरी होती है तो इसका खर्चा सरकार की ओर से किसी भी सूरत में नहीं किया जाएगा।
विदित रहे कि प्रदेश सरकार वर्तमान में राज्य के पांच प्रतिष्ठित कॉलेजों डीएवी कॉलेज कांगड़ा, सेंटबीड्ज शिमला, डीएवी कोटखाई, एमएसएलएम सुंदरनगर और एसडी कॉलेज भटोली को ग्रांट प्रदान कर रही है। सरकार से इन कालेजों को प्रतिवर्ष दी जाने वाली करोड़ों रुपए की ग्रांट कार्यरत शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन पर खर्च की जा रही है। इसके अलावा इन कॉलेजों को यूजीसी से भी वित्तीय सहायता मिल रही है।
शिक्षा सचिव पीसी धीमान का मानना है कि प्रदेश सरकार ने निजी कॉलेजों की ग्रांट को यथावत रखा है और भविष्य में ग्रांट में कोई बढ़ोतरी न करने का प्रावधान भी किया गया है।












