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Friday, November 06, 2009 01:10 [IST]  

danik bhaskarबैटिंग यूनिट के रूप में असफल

Ravi Shastri

sss_01गौतम गंभीर का न खेलना या किसी युवा खिलाड़ी को तीसरे नंबर पर खिलाना या धोनी द्वारा टॉस जीतने पर किया गया फैसला या सचिन तेंदुलकर का दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से आउट होना इत्यादि मैच हारने का कारण बताना महज एक बहाना होगा। वास्तव में भारत मोहाली में एक बैटिंग यूनिट के रूप में असफल रहा। किसी ने भी जिम्मेदारी नहीं संभाली और विकटें गिरती चली गईं।

ऐसा लगता है कि कप्तान की शिक्षा युवा खिलाड़ियों पर असर नहीं कर सकी। महत्वपूर्ण अवसरों पर भारत के युवा खिलाड़ी विराट कोहली, सुरेश रैना और रविन्द्र जडेजा असफल रहे। कोहली के पास अच्छी शुरुआत के बाद बेहतर पारी खेलने का मौका था। सुरेश रैना के पास भी पुछल्ले बल्लेबाजों को जोड़कर रखने का अवसर था और जडेजा के लिए यह दर्शाने का अवसर था कि वह सिर्फ गेंदबाजी के दम पर ही विश्व चैंपियनों के खिलाफ लगातार चार मैचों में नहीं खेल रहा है।

जब तक वे थोड़े अनुभवी बनें और मोर्चा संभालें, यह बेहतर होगा कि भारत के पास पहले से ही तैयार खतरनाक बैटिंग लाइनअप हो। गेंदबाजी (इशांत शर्मा को छोड़कर) और क्षेत्ररक्षण में जो टीम की कमजोरी कही जाती है, उन्होंने आज बेहतर प्रदर्शन किया। परंतु इशांत शर्मा के लिए भी आज क्षेत्ररक्षण में श्रेष्ठ दिन था, पिछले कुछ वर्षों के दौरान क्षेत्ररक्षण में यह सर्वश्रेष्ठ प्रयास था।

भारतीयों ने ऑस्ट्रेलिया, जैसे श्रेष्ठ विकटों के बीच दौड़ने वाले चार खिलाड़ियों को रन आउट किया, परंतु लाइट्स में भारतीय बल्लेबाजी बिखर गई। ऑस्ट्रेलिया ने वास्तविक चैंपियनों की तरह बड़े अवसरों का फायदा उठाया। पोंटिंग द्वारा युवराज को रनआउट करना मैच का निर्णायक क्षण था। डग बोलिंगर ने इसके बाद भारतीय बल्लेबाजों के नीचे से ३२वें ओवर में जमीन खिसका दी।

नॉथन हॉरित्ज ने कम घुमाव वाले इस विकट पर पूरा फायदा उठाया। क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है और यहीं भारत के साथ हुआ। निचले स्तर पर हरभजन सिंह एवं प्रवीण कुमार बेहतर कर सकते थे, परंतु मोहाली में स्थितियां भिन्न थी। यहां पर जमकर खेलने का अवसर था और मैच भारत की पहुंच में था, परंतु बल्लेबाजी बिखर गई। ऑस्ट्रेलिया नंबर एक के शिखर से लुढ़कने से बच गया।

उन्होंने अपनी आंखे बंद रखी और प्रार्थना की कि यह हार कितनी खतरनाक हो सकती थी। अब युवाओं का जवाब देखने लायक होगा। बेहतर टीम में बने रहेंगे और जो बेहतर नहीं खेल पाएंगे, उन्हें घरेलु श्रृंखलाओं में खेलना पड़ेगा। भारत को इस श्रृंखला में हराना अब भी कठिन है, परंतु अब नजरें भारत की युवा प्रतिभाओं पर होंगी। (टीसीएम)

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