अफगानी कबाब का स्वाद आपके शहर में
चंडीगढ़. कबाब की शुरुआत अफगान से हुई थी। उसी लजीज अफगानी कबाब का स्वाद आपको शहर में ही मिले तो क्या कहने। कॉपर चिमनी में शुक्रवार से 16 नवंबर तक दि ग्रेट इंडियन कबाब फेस्टिवल का आयोजन किया गया है।
फेस्टिवल में कबाब बनाने के लिए मुंबई से राजेश सिंह और रमिंदर शिंदे को बुलाया गया है। फेस्टिवल में नॉन वेज में 9 आइटम और वेज में 6 आइटम पेश किए गए हैं। शेफ राजेश सिंह ने बताया कि अभी तक मटन गलोटी कबाब बनता था, लेकिन इस फेस्टिवल में चिकन गलोटी कबाब खास तौर पर पेश किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह कबाब इतना खस्ता है कि इसको मुंह में डालने के बाद चबाने की जरूरत नहीं पड़ती, यह मुंह में घुल जाता है। उन्होंने बताया कि इसे बनाने के लिए चिकन का कीमा बनाकर इसमें मुगलाई मसाले डाले जाते हैं। मसाले भी खासतौर पर मुंबई से लाए गए हैं। हालांकि इस कबाब को अभी ज्यादा स्पाइसी नहीं बनाया गया है, लेकिन अगर यहां के कस्टमर स्पाइसी कबाब की डिमांड करेंगे तो वह भी पेश किया जाएगा।
कॉपर चिमनी ग्रुप के मैनेजर ऑपरेशन एंथनी ने बताया कि कॉपर चिमनी की ओर से देशभर में इस तरह के कबाब फेस्टिवल आयोजित किए जाते हैं, जिसमें लोगों को लजीज कबाब के साथ वेज कबाब भी परोसे जाते हैं। कॉपर चिमनी जल्द ही दुबई में भी रेस्टोरेंट खोलेगा।
फेस्टिवल में नॉन वेज
मुर्ग गलोटी कबाब, भट्टी दा साबुत मुर्ग, मुर्ग के सूले, पश्तूनी मुर्ग चॉप, कीमे की सीख, अवधी गोश्त की चांप, गोश्त टिक्का, माही टिक्का सरसोंवाला, झींगा मलाई।
वेजिटेरियन व्यंजनों में
पनीर का सोला, मुल्तानी पनीर के टुकड़े, हरियाली सब्ज और मटर की सीख, तंदूरी सब्जबहार, सब्ज शिकमपुरी कबाब, अफगानी मशरूम हैं। जैतून मिर्च कुल्चा और खजूर बादामी नान का स्वाद भी चखना न भूलें।











