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Friday, November 06, 2009 02:34 [IST]  

danik bhaskarजोर का झटका धीरे से

भास्कर न्यूज

lejar gunपंजाब पुलिस ने अमेरिकी पुलिस की तरह अपने जवानों को बिजली का झटका देने वाले टेसर गन से लैस कर दिया है. 80 पुलिसवालों को यह मिल भी चुकी है. दिल्ली, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की पुलिस को भी यह जल्दी ही मिलने वाली है.



क्यों



कानून व्यवस्था बनाने में हो, भीड़ नियंत्रित करते वक्त या फिर किसी गंभीर अपराध के बाद अपराधी के भागने पर, पुलिस के पास दो विकल्प होते हैं: डंडा या गोली. दोनों से सामने वाला अक्सर गंभीर रूप से घायल हो जाता है. गोली चलाने की स्थिति में तो अक्सर मर जाता है. मौत नहीं भी हो तो कई मामलों में लोगों के अपंग होने की आशंका रहती है. फिर पुलिस की जमकर खिंचाई होती है. ड्यूटी निभाते पुलिस वाले जांच कमीशन और निलंबन में उलझ जाते हैं.



क्या करती है टेसर



टेसर एक स्टन गन है, स्टेनगन नहीं. स्टन का मतलब है- झटका देना. और यह यही करती है. इसमें बुलेट नहीं, डार्ट होते हैं जो एक बहुत महीन धातु के धागे से पिस्टल से जुड़ा होता है. पिस्टल के अन्दर बैटरी होती है, जिसका वोल्टेज धागे से होकर नुकीले डार्ट तक पहुंचता है. जब अत्यधिक वायु दाब से यह पिस्टल से गोली की तरह छूटता है और अपने शिकार को छूता है तो शिकार को 50,000 वोल्ट बिजली का झटका लगता है. इससे शिकार को कुछ क्षणों के लिए लकवा सा मार जाता है. और उसे धर दबोचा जा सकता है.



इस्तेमाल कहां



टेसर इंटरनेशनल कंपनी के मुताबिक लगभग पचास देशों में 11,000 पुलिसकर्मी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. अमेरिका में तो लोग इसका घरेलू इस्तेमाल तक कर रहे हैं जो हास्यास्पद है. जैसे बिल्ली किसी घर में बिस्तर के अन्दर या किचन में कहीं घुस बैठे और उसे निकालने में मशक्कत हो, तो टेसर मारो, बेहोश करो और खींच लो.

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