अपने हिस्से की ग्रांट दो या पीयू से दावा छोड़ो
चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने के मसले पर केंद्र पंजाब सरकार को लिखेगा कि या तो वह पीयू को अपने हिस्से की पूरी ग्रांट दे या पीयू पर अपना दावा छोड़े दे। लेकिन पंजाब सरकार के पक्ष को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने पीयू के छात्रों से यही कहा है। इस पर छात्रों ने केंद्रीय मंत्री से सवाल किया कि अगर पंजाब में आपकी सरकार आती है, तो क्या इस मसले के आसानी से हल की उम्मीद की जा सकती है। इस पर सिब्बल ने कहा कि यह मुद्दा इतना आसान नहीं है, संवैधानिक और राजनीतिक मजबूरियां भी हैं।
सेंट्रल यूनिवर्सिटी के मसले पर राहुल गांधी ने पीयू के छात्रों को दिल्ली आने का न्यौता दिया था। इसी सिलसिले में सिब्बल ने दिल्ली गए इन छात्रों से करीब 35 मिनट तक बात की। पीयू की ओर से मास कम्युनिकेशन की छात्रा शिवानी नेगी, सोपू नेता वरिंद्र ढिल्लों, एनएसयूआई नेता नितिन गोयल, मनु मदान और सन्नी मेहता केंद्रीय मंत्री से मिले।
इस मुलाकात के दौरान इन छात्रों ने पीयू की मौजूदा आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि वित्तीय संकट की वजह से विद्यार्थियों पर हर साल फीस का बोझ बढ़ता जा रहा है। इस संकट से निकलने के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेटस ही एकमात्र विकल्प है। छात्रों का कहना था कि पंजाब सरकार अपने हिस्से की पूरी ग्रांट देने से तो बच रही है, लेकिन पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की राह में बाधा बनकर खड़ी है।
छात्रों का पक्ष सुनने के बाद केंद्रीय मंत्री ने इन छात्रों को इस मसले की संवैधानिक और राजनीतिक वास्तविकता से अवगत करवाया। पूरी स्थिति जानने के बाद छात्रों ने केंद्रीय मंत्री से विकल्प जानना चाहा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार पीयू की मौजूदा स्थिति से पूरी तरह परिचित है। इस मसले पर पंजाब सरकार से पहले दो मर्तबा बात हो चुकी है, लेकिन फिर बात की जाएगी।
पंजाब सरकार को पत्र लिखकर कहेंगे कि पंजाब सरकार अपने हिस्से की पूरी 40 फीसदी ग्रांट पीयू को दे। अगर पंजाब सरकार इस जिम्मेदारी को नहीं निभा सकती तो पीयू पर अपना दावा छोड़ दे। लेकिन सिब्बल ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार इस मसले पर पंजाब सरकार की राय की उपेक्षा नहीं कर सकती। पिछले डेढ़ साल से लटके पड़े इस मसले पर केंद्रीय मंत्री द्वारा पंजाब सरकार की राय को अहम माने जाने से यह भी तय हो गया है कि पीयू को यह दर्जा हासिल करने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ सकती है।











