मौसम विभाग, राडार का मामला उलझा
रायपुर. राजधानी और जगदलपुर में करोड़ों रुपए की लागत वाले कलर डॉप्टर वेदर राडार लगाने की योजना जमीन की वजह से अटक गई है। राजधानी के माना हवाई अड्डे में इसके लिए दो एकड़ जमीन मांगी गई है, जिसके बारे में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने अंतिम फैसला नहीं किया है। जगदलपुर में प्रस्तावित जमीन में वन भूमि का पेंच आ गया है। कई विकसित देशों में इस तरह का पूरा नेटवर्क तैयार किया गया है।
फिलहाल मौसम विभाग सेटेलाइट और मैदानी स्तर पर जुटाए जाने वाले आंकड़ों के आधार पर मौसम की भविष्यवाणी करता है। इसमें कई बार सही अनुमान लगाना आसान नहीं होता। डॉप्लर राडार आ जाने से बादलों के घनत्व, नमी की मात्रा और हवा की दिशा के सही आंकड़े विभाग को मिलेंगे। इसका सबसे ज्यादा लाभ हवाई सेवा और कृषि को मिलेगा।
मौसम विभाग के डायरेक्टर एमएल साहू का कहना है कि सेटेलाइट, जमीनी आब्जर्वेटरी और डॉप्लर से मिली सूचनाओं को मिलाकर मौसम का सही अनुमान लगा पाना आसान हो जाएगा। एक डॉप्लर का खर्च करीब आठ करोड़ रुपए के आसपास होता है, जिसके लिए 30 मीटर से ऊंची बिल्डिंग बनानी होती है।
मौसम विभाग ने डॉप्लर के लिए माना हवाई अड्डे को सबसे उपयुक्त पाया था। विभाग ने एएआई से हवाई अड्डे में दो एकड़ जमीन मांगी है। राज्य का दूसरा डॉप्लर जगदलपुर में हवाई अड्डे के पास लगाने का प्रस्ताव है।
राज्य शासन द्वारा इसके लिए तय की गई जमीन वनभूमि की केटेगरी में है। इसे हासिल करने में मौसम विभाग को पसीने छूट गए हैं। राज्य शासन से लेकर केंद्र शासन के पास तक पत्रव्यवहार किया जा रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि जमीन की वजह से सारा काम अटका हुआ है। जमीन मिल गई तो भवन बनाने का काम साल-डेढ़ साल में पूरा हो जाएगा।
उपकरणों की व्यवस्था में भी कोई देरी नहीं होगी। पहले चरण में भोपाल समेत कुछ स्थानों पर कलर डॉप्लर वेदर राडार लगाने की योजना थी, जिस पर तेजी से काम चल रहा है। इंदौर, ग्वालियर, रायपुर, जगदलपुर के अलावा उड़ीसा में चार स्थानों पर ऐसे राडार लगाए जाने हैं।











