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Friday, November 06, 2009 03:05 [IST]  

danik bhaskarहटाए गए डीपीआई सम्वर्तक

संजीव महाजन

चंडीगढ़. शिक्षा विभाग में नौकरी दिलाने के लिए अफसरों के नाम पर पैसे मांगे जाने के मामले में डीपीआई सम्वर्तक सिंह पर आखिरकार विभागीय कार्रवाई हो ही गई।

प्रशासक एसएफ रोड्रिग्स ने वीरवार को सम्वर्तक सिंह से डीपीआई का चार्ज वापस लेने का फैसला सुनाया। इससे पहले होम सेक्रेटरी राम निवास और एडवाइजर प्रदीप मेहरा ने सम्वर्तक को वापस हरियाणा भेजने की सिफारिश की थी। सम्वर्तक के एक जानकार जॉली पर भर्ती के लिए पैसे मांगने का आरोप है।

लंबे विचार के बाद रोड्रिग्स ने वीरवार को लिखा कि सम्वर्तक से डीपीआई का काम वापस ले लिया जाए, लेकिन उन्हें चंडीगढ़ प्रशासन से वापस न भेजा जाए। विभागीय सूत्रों के मुताबिक पंजाब कैडर के एक सीनियर अफसर शुरू से ही इस कोशिश में थे कि डीपीआई पर कोई आंच न आए। इन्हीं के दखल से न तो पुलिस ने इस जांच में खास दिलचस्पी दिखाई, न ही राजभवन से किसी सख्त कार्रवाई का इशारा हुआ।

सम्वर्तक सिंह से सिर्फ चार्ज वापस लेकर इस मसले की लीपापोती कर दी गई है। पुलिस ने जिला अदालत में शिक्षक भर्ती घोटाले के दो आरोपी जॉली और हरदेव सिंह के खिलाफ चार्जशीट दायर की। लेकिन इसमें सम्वर्तक सिंह से हुई किसी पूछताछ का जिक्र तक नहीं है। चार्जशीट में जॉली और हरदेव के कई मोबाइल नंबर और उनकी डिटेल को सामने लाया गया है, लेकिन उस नंबर की कॉल डिटेल नहीं है, जिससे सम्वर्तक सिंह और जॉली के बीच बातचीत होती थी।

पांच और रोलनंबर

चार्जशीट के मुताबिक पुलिस को जॉली से शिक्षक पद पर आवेदन करने वाले पांच आवेदकों के रोल नंबर और मोबाइल नंबर मिले थे। ये पांच आवेदक थे— प्रदीप वर्मा, चेतन, सुमन रानी, अनुराधा और प्राची मलिक। पुलिस अपनी जांच में यह सामने नहीं लाई कि क्या जॉली ने इनसे भी पैसे लिए थे।

जॉली सब जानता है, पुलिस माने तब न

पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि शिक्षक भर्ती घोटाला एक ऐसा मामला है जिसमें लंबी जांच-पड़ताल के बाद पुलिस यह तक पता नहीं लगा पाई कि आखिर आरोपियों को सीक्रेट जानकारियां कौन उपलब्ध कराता था? सूत्रों की मानें तो जॉली सब जानता ही नहीं वह पुलिस को बता भी चुका है कि पैसा किसके नाम पर मांगा गया था और इसे कैसे बांटा जाना चाहिए था। बावजूद इसके पुलिस कुछ नहीं कर पाई।

यह भी कहा जा रहा है कि चंडीगढ़ में ही बने रहने की चाहत पाले एक पुलिस अफसर इस मामले में इस हद तक प्रेशर में आए कि जांच को कहीं का कहीं ले गए। दो महीने की पड़ताल पर उन्होंने जो रिपोर्ट सौंपी उसमें वह यह तक नहीं बता सके कि शिक्षक भर्ती घोटाले में किस से कितने पैसे मांगे गए?

दो महीने, नतीजा जीरो.

भर्ती के लिए पैसा मांगने में शिक्षा विभाग के किसी अधिकारी की भूमिका है या नहीं, यह पता लगाने में पुलिस को करीब दो महीने लगे। जांच में कुछ सामने नहीं आया।

2 सिंतबर होम सेकेट्ररी रामनिवास के पास एडीसी शेरगिल कमलप्रीत को लाए और बताया कि जॉली शिक्षा विभाग के आला अफसरों के नाम पर पैसे मांग रहा है।3 सितंबर होम सेक्रेटरी के आदेश पर आरोपी जॉली और हरदेव के फोन पुलिस ने सर्विलांस पर लिए।5 सितंबर क्राइमब्रांच ने ट्रैप लगाकर जॉली व हरदेव को दबोचा।7 सितंबर जॉली के कब्जे से पुलिस को शिक्षक भर्ती के आवेदकों की लिस्ट हासिल हुई। जॉली ने उगला डीपीआई सम्वर्तक सिंह का नाम। कहा वे उनके साथ हैं।12 सितंबर पुलिस ने डीपीआई स्वर्तक सिंह को सवालों की फेहरिस्त दी और उन्हें 24 घंटे में जवाब देने को कहा।14 सितंबर सम्वर्तक सिंह ने जवाब देने के लिए मांगी एक दिन की मोहलत।17 सितंबर को डीपीआई ने दिया पुलिस को जवाब।21 सितंबर को पुलिस ने जॉली और हरदेव के तीन मोबाइल जांच के लिए सीएफएसएल भेजे।5 अक्टूबर को सीएफएसएल ने भेजी दो मोबाइल की रिपोर्ट, एक मोबाइल की रिपोर्ट नहीं कर सकी तैयार।10 अक्टूबर को शिक्षक भर्ती का मसला पहुंचा कैट। होम सेकेट्ररी, एसएसपी और डीपीआई को नोटिस जारी।12 अक्टूबर को पुलिस ने दोबारा पूछे डीपीआई से कुछ सवाल।14 अक्टूबर को पुलिस ने जॉली के खिलाफ फर्जी पते पर सिम हासिल करने का एक और केस दर्ज किया।19 अक्टूबर को पुलिस ने जॉली को जेल से दोबारा रिमांड पर लिया और दोबारा शुरू हुई जॉली से पूछताछ।20 अक्टूबर को पूरे केस की रिपोर्ट क्राइमब्रांच ने डीजीपी शांति कुमार जैन को सौंपी।23 अक्टूबर को जांच रिपोर्ट होम सेक्रेटरी को भेजी गई। रिपोर्ट में डीपीआई को क्लीन चिट दी गई। पुलिस ने डीपीआई की जॉली के साथ संबंधों पर सवाल उठाए।इसी दिन होम सेक्रेटरी राम निवास ने डीपीआई को रिपैट्रिएट करने की फाइल एडवाइजर के पास भेजी।25 अक्टूबर को एडवाइजर प्रदीप मेहरा ने भी डीपीआई को रिपैट्रिएट करने की फाइल गवर्नर हाउस भेजी।5 नवंबर को गवर्नर रोड्रिग्स ने रामनिवास के फैसले को ठुकराया,जबकि सम्वर्तक सिंह से डीपीआई का चार्ज वापस ले लिया।

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