अब चाहिए बस फांसी पर फैसला
चंडीगढ़. पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में विशेष अदालत से फांसी की सजा पाने वाले आरोपी बलवंत सिंह ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिख मामले में वकील की सेवाएं लेने से इंकार किया है।
बुड़ैल जेल में बंद बलवंत ने पत्र में कहा है कि उसे वकील नहीं विशेष अदालत से मिली फांसी की सजा पर हाईकोर्ट का फैसला चाहिए। बलवंत के इस पत्र पर जस्टिस एमएस गिल व जस्टिस आरसी गुप्ता ने मुख्य अपील याचिका के साथ ही 20 नवंबर को सुनवाई तय की है।
बलवंत ने पंजाबी में लिखे पत्र में कहा है कि उसे न्याय व्यवस्था में आस्था नहीं है। हाईकोर्ट ने अन्य आरोपियों की अपील याचिका के साथ ही उसके मामले पर भी एक साथ सुनवाई तय की है। साथ ही उसे एक वकील सहयोग के लिए दिया है। पत्र में कहा गया कि उसे किसी वकील का सहयोग नहीं चाहिए। वकील की मदद लेनी होती तो वह 14 साल पहले केस आरंभ होने के समय यह सहयोग लेता।
उसे विशेष अदालत से फांसी की सजा मिली है जिस पर वह अपना कोई विरोध दर्ज नहीं करना चाहता। उसे इस हत्या के लिए कोई अफसोस भी नहीं है और मौत की सजा को वह परमात्मा का प्रसाद मानता है। विशेष अदालत के समक्ष भी उसने स्वीकार किया था कि वह इस हत्याकांड में शामिल था।
उसने खुद मानव बम दिलावर सिंह के शरीर पर बम बांधे थे। ऐसे में अब खुद को निदरेष बताना उसे सही नहीं लगता। पत्र में मांग की गई कि उसके मामले पर अलग से विचार करते हुए यथासंभव शीघ्र फैसला लिया जाए।
गौरतलब है कि मामले में फांसी की सजा पाने वाले आरोपी जगतार सिंह हवारा व आजीवन कारावास की सजा पाने वाले तीन अन्य आरोपियों लखविंदर सिंह, गुरमीत सिंह व शमशेर सिंह ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर कर रखी है। एक अन्य आरोपी परमजीत सिंह भ्यौरा के मामले में विशेष अदालत में सुनवाई विचाराधीन है। हाईकोर्ट ने ऐसे में भ्यौरा पर विशेष अदालत का फैसला आने के बाद ही अपील पर सुनवाई आरंभ करने का फैसला लिया है।











