Danik Bhaskar Logo
| 42 Editions | 10 States

Friday, November 06, 2009 07:36 [IST]  

danik bhaskarसनातन धर्म संगठन में फूट

Bhaskar News

पानीपत. शहर की प्रतिष्ठित संस्था सनातन धर्म संगठन में पदाधिकारियों की फूट अब खुलकर सामने आ गई है। मामला 4 अक्तूबर को संगठन के पदाधिकारियों के चुनाव के बाद से
ही जोर पकड़ रहा है। संगठन से जुड़े पूर्व प्रधान अपनी अलग समिति बनाने के बाद मतभेद होने की बात को नकार रहे हैं, जबकि नवनियुक्त प्रधान ने मतभेद को स्वीकार किया है।



कब से है अस्तित्व में



श्री सनातन धर्म संगठन पानीपत में 1979 में अस्तित्व में आया था। उस समय संगठन में गुर प्रसाद बंसल को प्रधान और महामंत्री चेतन लाल शर्मा को बनाया गया था। उसके बाद से संगठन ने लगातार बढ़ते हुए अब विशाल रूप ले लिया है।



94 मंदिर हैं संगठन के अधीन



सनातन धर्म संगठन के अंतर्गत शहरभर के 94 मंदिर आते हैं। प्रत्येक मंदिर की सभा के पांच सदस्य सनातन धर्म संगठन में सदस्य और पदाधिकारी बनाए जाते हैं। प्रत्येक सदस्य से वार्षिक चंदे के रूप में 101 रुपए भी लिए जाते हैं। ये रुपए संगठन के कार्र्यो में इस्तेमाल किए जाते हैं।



ऐसे पड़ी संगठन में फूट



4 अक्तूबर को श्री सनातन धर्म संगठन के विशिष्ट सदस्यों की बैठक महाबीर मंदिर, महाबीर कालोनी में हुई थी। बैठक में तत्कालीन प्रधान प्रमोद खेड़ा ने सदस्यों से एक बार पुन: प्रधान बनाए जाने की सिफारिश की थी। लेकिन सदस्यों ने सूरज पहलवान को संगठन का प्रधान बनाया था। संगठन में फूट के बीज पड़ गए। फिर से प्रधान बनने के इच्छुक प्रमोद खेड़ा बैठक के बीच से ही उठ कर चले गए थे।



पूर्व प्रधान संगठन में दोबारा प्रधान बनने के इच्छुक थे। दोबारा प्रधान न बनने पर उनके संगठन से मतभेद उत्पन्न हो गए। इस कारण वे आजकल अपनी अलग समिति बनाकर कार्य कर रहे हैं। हालांकि मैंने उन्हें संगठन का सरपरस्त भी बनाया है। - सूरज पहलवान, नवनियुक्त प्रधान, श्री सनातन धर्म संगठन, पानीपत।



श्री सुंदर कांड पाठ सेवा समिति के नाम से समिति तो बनाई है, लेकिन संगठन से मैं अलग नहीं हुआ हूं। मेरा किसी से मतभेद भी नहीं है। नई समिति की मैंने कार्यकारिणी भी बना ली है। उसी के तहत सुंदर कांड पाठ करते हैं। - प्रमोद खेड़ा, पूर्व प्रधान, श्री सनातन धर्म संगठन, पानीपत।

  share
apne vichaar
post a comment
name:
email:
website:
code:
 
select your language:
Hindi Roman Hindi Phonetic English
comment: