जेलों में उजाले के नाम पर एक करोड़ का भ्रष्टाचार
रायपुर. प्रदेश की जेलों में हाईमास्ट सिस्टम लगाने के लिए दिए गए ठेके में करीब एक करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का मामला फूटा है। गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने ठेका रद्द कर जांच के आदेश दिए हैं। ‘दैनिक भास्कर’ को सूत्रों से गृहमंत्री ननकीराम कंवर की नोटशीट की प्रति मिली है, जिसमें इस गड़बड़ी का बिंदुवार जिक्र है।
दिलचस्प बात यह है कि जिन अफसरों की देखरेख में विवादित टेंडर हुए उन्होंने मामले की जानकारी से ही इनकार दिया। पड़ताल में पता चला कि पहली दफे टेंडर प्रक्रिया 2006 में शुरू हुई, जो 2007 तक चली।
टेंडर में कई नामी कंपनियों ने हिस्सा लिया, लेकिन उनकी कम दरों को अनदेखा कर मेसर्स एमडी का रेट कांट्रेक्ट फाइनल कर दिया गया। उसने प्रति यूनिट रेट 9 लाख 11 हजार 62 रुपए की दर दी थी।
अन्य नामी कंपनियां यह सिस्टम 4.65 लाख रुपए से 7.25 लाख रुपए तक लगाने को तैयार हैं। खास यह कि ठेका देते समय राजधानी में नगर निगम के लिए हाईमास्ट लाइट लगाने वाली कंपनी की दरों को भी अनदेखा किया गया।
नियमों को दरकिनार कर ठेका लेने वाली कंपनी को मार्च 09 और अक्टूबर 09 को दो बार एक्टेंशन दिया गया। जेल प्रशासन ने सीएसआईडीसी के अनुमोदित रेट 9 लाख 11 हजार 62 रुपए में हाईमास्ट लाइटें लगाने आदेश जारी कर दिए।











