कर्नाटक में संकट गहराया, 53 विधायकों ने सौंपा इस्तीफा
नई दिल्ली. बेल्लारी के बादशाह रेड्डी बंधुओं ने भाजपा के केंद्रीय नेताओं की ओर से घंटों माथापच्ची के बाद तैयार किए गए समझौते को मानने से इनकार कर दिया है। उनके इस अड़ियल रुख से पार्टी के दिग्गज भी खफा हो गए हैं। इसी के साथ जर्नादन रेड्डी ने 53 विधायकों के इस्तीफे सुषमा स्वराज को सौंप दिए हैं।
इस बीच, पार्टी आलाकमान इस बात पर अडिग है कि मुख्यमंत्री बदला नहीं जाएगा। उधर, सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री येदियुरप्पा भी बागियों की कई मांगें मानने को तैयार हो गए थे। इन मांगों में ग्रामीण विकास मंत्री शोभा करंदलाजे को कैबिनेट से हटाने और बागियों के नेता विधानसभा अध्यक्ष जगदीश शेट्टार को गृह मंत्रालय देना शामिल था।
हालांकि वे खनन की साइट से माल ले जाने वाले ट्रकों पर लगाई गई लेवी को वापस लेने और प्रशासनिक अधिकारियों के व्यापक बदलाव को तैयार नहीं थे। मालूम हो कि यह रेड्डी बंधुओं की प्रमुख मांग है। गतिरोध बने रहने से गुरुवार रात तक संकट का पटाक्षेप होने की संभावनाएं धूमिल हो गईं।
फिलहाल, आलाकमान ने मुख्यमंत्री को दिल्ली में ही रुकने का सुझाव दिया है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को पार्टी की ओर से औपचारिक बयान जारी हो सकता है। इससे आगे की रणनीति का खुलासा हो पाएगा।
दिल्ली में डेरा डाले रेड्डी बंधुओं ने गुरुवार को अपना अड़ियल रुख बरकरार रखा। करीब तीन घंटे तक अध्यक्ष राजनाथ सिंह के आवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, वेंकैया नायडू, रामलाल व अनंत कुमार के बीच चर्चा हुई थी। बैठक में येदियुरप्पा व प्रदेश अध्यक्ष सदानंद गौड़ा भी मौजूद थे। इसके बाद राजनाथ सिंह ने साफ किया था कि मुख्यमंत्री को हटाने पर किसी तरह का विचार नहीं हो रहा है।
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