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Friday, November 06, 2009 12:24 [IST]  

danik bhaskarफिल्म रिव्यू : जेल

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jailफिल्म - जेल

एक्टर - नील नितिन मुकेश, मुग्धा गोडसे, मनोज वाजपेयी, आर्य बब्बर, चेतन पंडित, घनश्याम गर्ग, राहुल सिंह, सयाली भगत।

निर्देशनक - मुधर भंडारकर

हकीकत कई बार इतनी विभत्स होती है कि वह सच्चाई से परे लगने लगती है, इतना कह देना जेल फिल्म के बारे में शुरूआती जानकारी तो दे देता है लेकिन......। कई बार आप हलके फुलके मनोरंजन के लिए फिल्म देखने जाते हैं। लेकिन जेल फिल्म देखने जाएंगे तो ऐसा नहीं होगा, क्योंकि आपके मन मस्तिष्क पर मधुर भंडारकर की ये फिल्म उनकी अन्य फिल्मों की तरह ही प्रहार करेगी।

मधुर भंडारकर बॉलीवुड के उन निर्देशकों में से हैं जो केवल तीन घंटे के मनोरंजन के लिए फिल्म नहीं बनाते, बल्कि दर्शकों के दिल और दिमाग पर थियेटर से बाहर निकलने औऱ घर लौटने तक छाए रहने की भरसक कोशिश करते हैं।

फिल्म जेल के माध्यम से मधुर ने न केवल जेल की भयावहता को चित्रित करने की कोशिश की है बल्कि कैदी के जहन में उतरने का सफल प्रयास भी किया है। बॉलीवुड में ..एक हसीना था, अंडरट्रायल, तीन दीवारें और न जाने कितनी ही फिल्म जेल पर बनी हैं लेकिन मधुर की ये फिल्म इन सभी से अलग है।

फिल्म में सभी कलाकारों का अभिनय लाजवाब है और हमेशा की तरह मधुर कलाकारों को अपने हिसाब से ढालने में कामयाब रहे हैं। यह फिल्म आपको वह दिखाएगी जो शायद आम आदमी अपनी पूरी जिंदगी कभी नहीं देख पाता है और शायद देखना और महसूस करना चाहता भी नहीं।

फिल्म में मनोरंजन भले ही न हो लेकिन ऐसा बहुत कुछ है जिसे देखने दर्शक थियेटर तक जाना चाहेंगे। थीम थोड़ी रफ और डार्क है लेकिन मधुर ने अपनी ट्रू रियालिटी स्टाईल में उसे बखूबी परदे पर उकेरा है। मधुर की हर फिल्म कोई नई भाषा में गढ़ी जाती है और एक नए ट्रीटमेंट के साथ एक नई काली दुनिया का खुलासा करती है।

यह कहानी भी एक प्रेमी और उसकी सपनों की मलिका को पाने की जद्दोजहद की है। वह तब आश्चर्य में पड़ जाता है जब एक दिन उसकी आंख सुबह जेल में खुलती है। इसी सीक्वेंस में आगे बढ़ती है जेल की कहानी जो आपके जेल से जुड़े कई जालों को झाड़ देगी।

फिल्म में नील के न्यूड सीन की चर्चा लंबे समय से होने लगी थी जो सचमुच कहा जाए तो स्क्रिप्ट में फालतू नहीं लगता। फिल्म के शेड के चलते गानों से ज्यादा उम्मीद तो नहीं की जा सकती लेकिन मधुर संगीत पर काफी ध्यान देते हैं और जेल के गाने भी बखूबी स्टोरी से गूंथे गए हैं।

मुग्धा गोडसे ने अपना किरदार बेहतरीन तरीके से निभाया है, वहीं नील और मनोज वाजपेयी की एक्टिंग लाजवाब है। फिल्म का ज्यादातर भाग जेल के एक सेट पर शूट की गई है जिसके लिए सेट डिजायनर की तारीफ लाजमी है। हार्ड, रियल और दिमाग पर असर करने वाली गंभीर फिल्म की चाहत रखने वालों को फिल्म जरूर पसंद आएगी।

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विचार:

dharmendra

Friday, 13th Nov 2009, 13:50
Really awesome movie....it left a impact on my mind. Really jail conditions are not for human being. people are going to jail as a punishment not for a punishmnet.Same time I would like to say to people to aviod from indulging in any kind of crime.

apne vichaar
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